इंफाल, 16 मार्च (khabarwala24)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंफाल सब-जोनल कार्यालय ने मणिपुर में संचालित कथित अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 50.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज, स्मार्ट सोसाइटी और उनसे जुड़े अन्य संस्थानों से संबंधित है। ईडी ने इस संबंध में तीसरा प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है।
ईडी की ओर से अटैच की गई संपत्तियों में बैंक खातों में जमा राशि के अलावा अचल और चल संपत्तियां शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों में भूमि और इमारतें तथा कई औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं, जिनमें राइस मिल, फ्लोर मिल, खाद्य तेल रिफाइनरी, मशरूम प्लांट, एमू फार्म, फिश फार्म और जिम उपकरण जैसी संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां सलाई ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के नाम पर दर्ज पाई गई हैं।
ईडी ने यह जांच मणिपुर पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर इंफाल वेस्ट जिले के लाम्फेल पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। मामले में यांबेम बीरेन और नारेंगबाम समरजीत को आरोपी बनाया गया है। दोनों आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने भारत संघ से मणिपुर को अलग घोषित करने जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया, जिससे राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य और घृणा फैलाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले में नारेंगबाम समरजीत सिंह, यांबेम बीरेन और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपियों ने सलाई ग्रुप और उसकी सहयोगी संस्था स्मार्ट सोसायटी के माध्यम से लोगों से अवैध तरीके से धन जुटाया। लोगों को निवेश पर 36 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न का लालच देकर पैसा जमा कराया गया, जबकि इसके लिए उनके पास कोई वैध लाइसेंस या अधिकार नहीं था। इस धन को सलाई ग्रुप की 19 कंपनियों के माध्यम से घुमाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई और कथित तौर पर इसका इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों सहित अन्य गैरकानूनी कार्यों में किया गया।
जांच में सामने आया कि सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज को बॉम्बे मनी लेंडर्स एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया था। इस कानून के तहत संस्था को केवल पैसा उधार देने की अनुमति थी, लेकिन आरोप है कि आरोपियों ने इस पंजीकरण का दुरुपयोग करते हुए सार्वजनिक जमा स्वीकार करना शुरू कर दिया। संस्था ने बैंक या एनबीएफसी की तरह काम किया, जबकि इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। जमा की गई राशि को बाद में कंपनियों के खातों, निदेशकों के व्यक्तिगत खातों और विभिन्न निवेशों के जरिए घुमाया गया।
बाद में इस मामले में सीबीआई ने 15 मार्च 2023 को एफआईआर दर्ज की। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी और 420 तथा बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट, 2019 के प्रावधान लगाए गए।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अवैध पोंजी और मनी सर्कुलेशन स्कीम की तरह संचालित किया जा रहा था। एजेंसी ने 9 नवंबर 2024 को चार्जशीट नंबर 87/2024 दाखिल करते हुए बताया कि आरोपियों ने 46.43 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जनता से धोखाधड़ी के जरिए जुटाई।
जांच के दौरान ईडी ने पहले चरण में सलाई मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में मौजूद लगभग 11.26 लाख रुपए और सलाई एग्री कंसोर्टियम प्रा. लिमिटेड के खाते में लगभग 2.32 करोड़ रुपए को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इन अटैचमेंट को बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी पुष्टि कर दी। इसके बाद ईडी ने पीएमएलए की विशेष अदालत, इंफाल ईस्ट में अभियोजन शिकायत भी दायर की।
आगे की जांच में पता चला कि अपराध से अर्जित धन को व्यावसायिक खर्च, संपत्ति खरीद, मशीनरी आयात, कस्टम ड्यूटी और आयकर भुगतान, निदेशकों की विदेश यात्राओं, क्रेडिट कार्ड भुगतान और कर्मचारियों के जरिए नकद निकासी में इस्तेमाल किया गया। कुछ रकम से नकद में संपत्तियां भी खरीदी गईं।
ईडी ने जांच के दौरान 28 अचल संपत्तियों और 5 चल संपत्तियों की पहचान की, जो सलाई ग्रुप, स्मार्ट सोसायटी और उससे जुड़े संस्थानों के नाम पर थीं और कथित तौर पर अपराध की आय से खरीदी गई थीं। इन सभी संपत्तियों को मिलाकर 50.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया गया है। ईडी के अनुसार, अब तक सलाई ग्रुप और उससे जुड़े संस्थानों की कुल 53.22 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की जा चुकी हैं। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी कार्रवाई हो सकती है।
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