दिल्ली, 7 मार्च (khabarwala24)। भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर स्वाति शांता कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उन्हें उनके प्रोजेक्ट ‘समान भागीदार, स्थायी शांति’ के लिए यूएन सेक्रेटरी जनरल अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया है।
मेजर स्वाति दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएसआईएसएस) में एंगेजमेंट प्लाटून कमांडर के रूप में तैनात थीं। इस मिशन के तहत उन्होंने 20-सदस्यीय ऑल-वुमेन टीम का नेतृत्व किया, जो इस मिशन में अपनी तरह की पहली टीम रही। दक्षिण सूडान जैसे चुनौतीपूर्ण हालात वाले क्षेत्र में मेजर स्वाति और उनकी टीम ने शांति स्थापना के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के बीच भरोसा कायम किया। उन्होंने विशेष रूप से जेंडर-इन्क्लूसिव पेट्रोलिंग को बढ़ावा दिया और यह सुनिश्चित किया कि महिला शांति रक्षक हर ऑपरेशन और गतिविधि में सक्रिय भूमिका निभाएं।
khabarwala24 से बातचीत में मेजर स्वाति ने कहा, “मुझे हाल ही में लैंगिक समावेशी शांतिरक्षा के लिए यूएन सेक्रेटरी जनरल अवॉर्ड 2025 का पुरस्कार लैंगिक श्रेणी में मिला है। यह पुरस्कार मेरी टीम के प्रयासों को दर्शाता है, क्योंकि हम भारत की 20 महिला सैनिकों की टीम थीं और यह पहली बार था जब हम दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भाग ले रही थीं। यह सम्मान मेरी टीम के संपूर्ण परिश्रम और बटालियन, सेना मुख्यालय और यहां तक कि भारतीय सेना के मार्गदर्शन को दर्शाता है। क्योंकि भले ही हम जमीनी स्तर पर सैनिक थे, लेकिन हमें दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय से हमेशा मार्गदर्शन मिलता था और उसी के आधार पर हम आगे बढ़ पाते थे।”
मेजर स्वाति ने आगे कहा, “‘समान भागीदार, स्थायी शांति’ परियोजना का मूल उद्देश्य वे कार्य थे, जो मेरी टीम ने पूरे मिशन के दौरान किए। जब हम मिशन क्षेत्र में पहुंचे, तो महसूस किया कि समुदाय और संयुक्त राष्ट्र मिशन के बीच एक छोटा सा फासला है। इसके बाद हमने गतिविधियों में शामिल होना शुरू किया। हमने परिचालन गश्त शुरू की और समुदाय तक पहुंचना शुरू किया।”
मेजर स्वाति ने कहा, “मेरी प्राथमिक जिम्मेदारियां परिचालन गतिविधियों को अंजाम देना था, जैसे कि हम मुख्य रूप से गश्ती दल की योजना बनाने में शामिल थे, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मिशन में तैनात एक बटालियन के रूप में, हम विभिन्न प्रकार की गश्त करते हैं, चाहे वह छोटी या लंबी दूरी की हो। हम नदी और हवाई गश्त करते हैं, क्योंकि दक्षिण सूडान का क्षेत्र पूरी तरह से दुर्गम है, बरसात के मौसम में सड़कें दुर्गम हो जाती हैं, और इसी कारण से हमें दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके अपनाने पड़ते हैं। इल मिशन में हमारी कार्रवाइयों का मात्र एक उदाहरण है। इसलिए जब हम वहां गए, तब हमें एहसास हुआ कि महिला सैनिकों या महिला शांति रक्षकों को अभियानों में और अधिक शामिल करने की आवश्यकता है।
मेजर स्वाति ने आगे कहा, “प्रशिक्षण के दौरान और भारत में अपनी पूरी तैनाती के दौरान भी मैंने हमेशा इसी सिद्धांत का पालन किया है और हमारा पूरा प्रशिक्षण इसी दिशा में केंद्रित रहा है। इसलिए जब हम शांतिरक्षा मिशन में जाते हैं और वहां के लोगों के साथ संपर्क या बातचीत करते हैं, तब हमें एहसास होता है कि हम यहां अपने राष्ट्र का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”
—khabarwala24
ओपी/एएस
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