Khabarwala 24 News New Delhi: Raja Shivaji Review मराठी सिनेमा लंबे समय से जिस भव्य ऐतिहासिक फिल्म का इंतजार कर रहा था, वह आखिरकार बड़े पर्दे पर आ चुकी है नाम है ‘राजा शिवाजी’। करीब 100 करोड़ के विशाल बजट में बनी यह फिल्म न केवल मराठी सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है, बल्कि इसे हिंदी में भी उसी भव्यता के साथ रिलीज किया गया है। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भावनाएं, तकनीक और सिनेमाई भव्यता का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो इसे एक अलग स्तर पर ले जाता है।
निर्देशन की कमान संभालने के साथ-साथ मुख्य भूमिका निभा रहे रितेश देशमुख ने इस फिल्म के जरिए यह साबित करने की कोशिश की है कि वह सिर्फ एक सफल अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी फिल्ममेकर भी हैं। ‘राजा शिवाजी’ केवल एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सिनेमाई यात्रा है, जो दर्शकों को स्वराज, साहस और आत्मसम्मान की भावना से जोड़ती है।
इतिहास के पन्नों से निकली जीवंत गाथा (Raja Shivaji Review)
फिल्म की कहानी 17वीं सदी के उस दौर से शुरू होती है, जब दक्कन की धरती पर अत्याचार, संघर्ष और सत्ता की लड़ाई अपने चरम पर थी। साल 1629 की पृष्ठभूमि में कहानी उस घटना को दिखाती है, जिसने इतिहास की दिशा बदल दी। देवगिरी किले में सुल्तान बुरहान निजाम शाह के आदेश पर शिवाजी महाराज के नाना लखुजी राजे जाधव और उनके परिवार की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है।

यह घटना केवल एक परिवार का अंत नहीं थी, बल्कि यह उस विद्रोह की चिंगारी थी, जिसने आगे चलकर स्वराज के आंदोलन को जन्म दिया। इसी उथल-पुथल भरे माहौल में मां जिजाऊ अपने पुत्र शिवाजी को ऐसे संस्कार देती हैं, जो उन्हें एक महान योद्धा और दूरदर्शी शासक बनाते हैं।
फिल्म का सबसे रोमांचक हिस्सा तब आता है, जब अफजल खान और शिवाजी महाराज के बीच ऐतिहासिक टकराव दिखाया जाता है। यह सीन न केवल फिल्म का क्लाइमेक्स बनता है, बल्कि दर्शकों के भीतर रोमांच और गर्व की भावना भी भर देता है। युद्ध के दृश्य, रणनीति और संवाद इतने प्रभावशाली हैं कि दर्शक खुद को उस दौर में महसूस करने लगते हैं।
रितेश देशमुख की सबसे बड़ी छलांग (Raja Shivaji Review)
रितेश देशमुख के लिए यह फिल्म एक बड़ा चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट थी। ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ जैसे ऐतिहासिक और भावनात्मक विषय पर फिल्म बनाना किसी भी निर्देशक के लिए आसान नहीं होता। दर्शकों की अपेक्षाएं बहुत ऊंची होती हैं और जरा सी चूक भी आलोचना का कारण बन सकती है।
लेकिन रितेश ने इस चुनौती को बखूबी निभाया है। उन्होंने फिल्म को न केवल भव्य बनाया है, बल्कि इसकी भावनात्मक गहराई को भी बरकरार रखा है। उनके निर्देशन में एक स्पष्ट विजन नजर आता है, जो हर फ्रेम में दिखाई देता है।
यह फिल्म उनके करियर की सबसे साहसी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक मानी जा सकती है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह बड़े स्तर की ऐतिहासिक फिल्मों को संभालने की क्षमता रखते हैं।
एक्टिंग: कलाकारों ने डाल दी जान (Raja Shivaji Review)
फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी इसकी शानदार एक्टिंग है। रितेश देशमुख ने शिवाजी महाराज के किरदार को पूरी शिद्दत और गरिमा के साथ निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद अदायगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति इतनी प्रभावशाली है कि दर्शक उन्हें एक अभिनेता नहीं, बल्कि ‘राजा’ के रूप में देखते हैं।
संजय दत्त ने अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से फिल्म में अलग ही ऊर्जा भर दी है। अभिषेक बच्चन भी अपने किरदार में पूरी तरह फिट नजर आते हैं और कहानी को मजबूती देते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने मराठी संवाद भी प्रभावी ढंग से बोले हैं।
विद्या बालन ने अपनी शानदार अभिनय क्षमता से फिल्म में जान डाल दी है। उनके संवाद और स्क्रीन पर उनकी उपस्थिति बेहद प्रभावशाली है। भाग्यश्री का काम संतोषजनक है, हालांकि उनकी भाषा पर थोड़ी और पकड़ होती तो प्रभाव और बढ़ सकता था।
जितेंद्र जोशी और सचिन खेड़ेकर ने अपने अनुभव से फिल्म को मजबूत आधार दिया है। वहीं बोमन ईरानी और जेनेलिया देशमुख छोटे लेकिन असरदार किरदारों में नजर आते हैं। फिल्म के क्लाइमेक्स में सलमान खान का स्पेशल अपीयरेंस दर्शकों के लिए सरप्राइज पैकेज की तरह है, जो थिएटर में उत्साह बढ़ा देता है।

तकनीकी पक्ष और म्यूजिक : फिल्म की असली ताकत (Raja Shivaji Review)
फिल्म का संगीत अजय-अतुल ने तैयार किया है, जो इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। ‘जय शिवराय’ जैसे गीत दर्शकों के भीतर जोश भर देते हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर हर दृश्य को और प्रभावशाली बना देता है।
संतोष सिवन की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक विजुअल ट्रीट बनाती है। हर फ्रेम में भव्यता और ऐतिहासिकता झलकती है। युद्ध के दृश्य, किले, प्राकृतिक लोकेशन और कैमरा एंगल्स इतने शानदार हैं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
वीएफएक्स का उपयोग भी काफी प्रभावशाली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का इस्तेमाल फिल्म को बड़े पैमाने की भव्यता देता है।
फिल्म में कमियां: जहां सुधार की गुंजाइश (Raja Shivaji Review)
हालांकि फिल्म कई मायनों में शानदार है, लेकिन इसकी लंबाई थोड़ी ज्यादा महसूस होती है। कुछ हिस्सों में एडिटिंग को और बेहतर किया जा सकता था। अगर फिल्म थोड़ी और कसी हुई होती, तो इसका प्रभाव और भी अधिक हो सकता था।
फिल्म को देखें या न देखें? (Raja Shivaji Review)
‘राजा शिवाजी’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक अनुभव है। यह फिल्म दर्शकों को इतिहास से जोड़ती है और स्वराज, साहस और आत्मसम्मान की भावना को जागृत करती है।
अगर आप भव्य ऐतिहासिक फिल्मों के शौकीन हैं, अगर आप छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके संघर्ष को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
यह फिल्म हमें यह भी याद दिलाती है कि शिवाजी महाराज केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि वह जनता के ‘रैयतेचा राजा’ थे, जिन्होंने हर वर्ग और धर्म के लोगों को साथ लेकर एक न्यायपूर्ण समाज का सपना देखा।
आज के समय में, जब हम अपने मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसी फिल्में हमें अपने इतिहास और आदर्शों की याद दिलाती हैं। ‘राजा शिवाजी’ एक विजुअल ट्रीट, एक भावनात्मक सफर और गौरवशाली अतीत से जुड़ने का एक शानदार अवसर है।
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