पाकिस्तान में हिरासत में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म ने उजागर की गंभीर प्रक्रियात्मक विफलता: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 24 जनवरी (khabarwala24)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जैकबाबाद जिले में पुलिस हिरासत में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में गंभीर प्रक्रियात्मक विफलताओं को उजागर कर दिया है। इस मामले में छह पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी को भले ही सिस्टम के काम करने का […]

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इस्लामाबाद, 24 जनवरी (khabarwala24)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जैकबाबाद जिले में पुलिस हिरासत में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में गंभीर प्रक्रियात्मक विफलताओं को उजागर कर दिया है। इस मामले में छह पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी को भले ही सिस्टम के काम करने का उदाहरण बताया जा रहा हो, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित जवाबदेही को वास्तविक न्याय नहीं माना जा सकता।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला बंदियों को पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ एक निजी स्थान पर रखा गया, जो अपने आप में अवैध हिरासत है। रिपोर्ट के अनुसार, “यौन उत्पीड़न का सवाल, चाहे जितना भयावह हो, उसके बाद आता है। राज्य पहले ही अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। हिरासत का उद्देश्य पुलिस शक्ति को सीमित करना होता है, न कि उसे बढ़ाना।”

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिलाओं और बच्चों को हिरासत में रखकर उनके पुरुष रिश्तेदारों पर दबाव बनाया गया, जो एक अलग आपराधिक मामले में वांछित थे। इसे जबरन दबाव की एक अमानवीय और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया गया है, जिसका किसी भी सभ्य कानूनी व्यवस्था में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे तौर-तरीके इसलिए जारी रहते हैं क्योंकि इनके लिए शायद ही कभी सख्त कार्रवाई होती है। कई इलाकों में पुलिस से न्याय की उम्मीद करना- खासकर तब, जब आरोप खुद पुलिसकर्मियों पर हों, बेहद जोखिम भरा माना जाता है। स्वतंत्र शिकायत तंत्र और गवाहों की सुरक्षा के बिना कानूनी उपाय केवल कागजी साबित होते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, महिला पुलिसकर्मियों की कमी और प्रभावी महिला संरक्षण प्रकोष्ठों का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। हिरासत में उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए सुरक्षा उपाय पाकिस्तान में आज भी लागू नहीं हो सके हैं।

रिपोर्ट में जोर देते हुए कहा गया, “इस मामले को व्यक्तिगत अपराध से आगे बढ़कर संस्थागत जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। हिरासत की अनुमति किसने दी? निगरानी किसने की? हस्तक्षेप करने में कौन विफल रहा? और यह तय कौन कर रहा है कि जवाबदेही कहां तक जाएगी?”

पिछले साल दिसंबर में, इस्लामाबाद स्थित संस्था ‘साहिल’, जो लैंगिक हिंसा पर नजर रखती है, ने 2025 के पहले 11 महीनों में पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेज वृद्धि की रिपोर्ट दी थी।

इस रिपोर्ट में चारों प्रांतों, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के 81 राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके अनुसार, 2025 में कुल 6,543 अपराध दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 5,253 थी, यानी करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि।

जनवरी से नवंबर 2025 के बीच दर्ज मामलों में 1,414 हत्याएं, 1,144 अपहरण, 1,060 शारीरिक हमले, 649 आत्महत्या के मामले और 585 दुष्कर्म की घटनाएं शामिल हैं।

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