दिल्ली साउथ-वेस्ट पुलिस की बड़ी कार्रवाई: शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश, 8 गिरफ्तार

नई दिल्ली, 18 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर पुलिस टीम ने निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 8 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह आम जनता को शेयर ट्रेडिंग और निवेश में मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी […]

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नई दिल्ली, 18 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर पुलिस टीम ने निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 8 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह आम जनता को शेयर ट्रेडिंग और निवेश में मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी कर रहा था। ठगी की रकम को भारत के म्यूल खातों के जरिए कंबोडिया में बैठे सरगनाओं तक पहुंचा रहा था।

पुलिस की इस कार्रवाई में 4 राज्यों में छापेमारी की गई, जिसमें 10 हाई-टेक मोबाइल फोन और कई म्यूल बैंक खातों से जुड़े अहम डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि बीते 14 दिनों में इन म्यूल खातों में लगभग 4 करोड़ रुपए जमा कराए गए थे। साथ ही 63 एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी पाई गई हैं।

7 नवंबर 2025 को थाना साइबर, साउथ-वेस्ट जिला में एफआईआर दर्ज की गई। वसंत कुंज निवासी 42 वर्षीय महिला ने शिकायत में बताया कि उसे व्हाट्सएप के जरिए शेयर ट्रेडिंग में विशेषज्ञ मार्गदर्शन और गारंटीड रिटर्न का झांसा दिया गया। फर्जी दावों और नकली निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए महिला को मानसिक रूप से प्रभावित कर उससे कुल 15.58 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए।

लगातार बढ़ रहे निवेश फ्रॉड मामलों को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई चेतन राणा, एचसी मनेंदर और एचसी विजयपाल शामिल थे। यह टीम एसीपी ऑप्स साउथ-वेस्ट जिला विजय पाल सिंह तोमर की निगरानी में काम कर रही थी। तकनीकी निगरानी, मनी ट्रेल एनालिसिस और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के आधार पर सबसे पहले तेलंगाना निवासी वनापटला सुनील कुमार की पहचान हुई, जो कमीशन पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता था। तेलंगाना में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कीसरा (तेलंगाना) में फर्जी फर्म खोलकर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाता खुलवाने की बात कबूली।

इसके बाद हैदराबाद से उसके सहयोगी सकीनाला शंकर को गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि यह खाता मनोज यादव को दिया गया था। उत्तर प्रदेश में दबिश देकर संत कबीर नगर से मनोज यादव को पकड़ा गया। आगे की जांच में संदीप सिंह उर्फ लंकेश (बनारस) और आदित्य प्रताप सिंह (कोटा, राजस्थान) की गिरफ्तारी हुई, जो देशभर में म्यूल खाते जुटाकर टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे हैंडलर्स को उपलब्ध कराते थे।

ठगी की रकम बाद में राहुल और सोमपाल के खातों में ट्रांसफर की जाती थी। राहुल और शेरू को दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से, जबकि सोमपाल को बरेली से गिरफ्तार किया गया। सोमपाल ने एमबीए की पढ़ाई कर रखी है और पहले एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता था, जिसके बंद होने के बाद उसने अपना कॉर्पोरेट अकाउंट साइबर अपराधियों को सौंप दिया। उसके खाते से जुड़ी 51 एनसीआरपी शिकायतें पाई गईं।

आरोपी की पहचान वनापटला सुनील कुमार (43), सकीनाला शंकर (61), मनोज यादव (38), संदीप सिंह उर्फ लंकेश (30), आदित्य प्रताप सिंह (23), राहुल (30), शेरू (38) और सोमपाल (34) के रूप में हुई। आरोपियों के पास से 10 स्मार्टफोन और 13 सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल म्यूल खातों के संचालन और रकम ट्रांसफर में किया जा रहा था।

पुलिस के मुताबिक, व्हाट्सएप पर पीड़ितों को लुभाने वाले नंबर कंबोडिया से संचालित किए जा रहे थे, जबकि भारत में बैठे आरोपी म्यूल खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाकर विदेश भेजते थे। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।

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