नई दिल्ली, 11 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने संगठित तरीके से बड़े पैमाने पर वाहन लोन फ्रॉड करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मनगढ़ंत आयकर रिटर्न (आईटीआर) के जरिए विभिन्न बैंकों से वाहन ऋण हासिल किए और जानबूझकर उनकी अदायगी नहीं की। इस कार्रवाई में मर्सिडीज समेत कुल पांच वाहन बरामद किए गए हैं।
क्राइम ब्रांच की ओर से इस संबंध में रविवार को जारी प्रेस नोट के अनुसार, 25 दिसंबर को साइबर सेल, क्राइम ब्रांच की टीम को इस संगठित गिरोह के बारे में विशेष सूचना मिली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर संदीप सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने लगातार निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वर्क के जरिए जांच शुरू की। यह टीम एसीपी अनिल शर्मा की निगरानी में काम कर रही थी।दिल्ली: वाहन लोन फ्रॉड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश; तीन गिरफ्तार, पांच गाड़ियां बरामद
जांच में सामने आया कि आरोपी लोन की रकम जारी होने के बाद जानबूझकर किस्तों का भुगतान नहीं करते थे, जिससे लोन एनपीए घोषित हो जाते थे। साथ ही, वाहन को अलग-अलग राज्यों में दोबारा पंजीकृत कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जाती थी। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपी अमन कुमार ने राहुल कपूर, श्याम सुंदर और राय कपूर जैसे कई फर्जी नामों से पहचान बनाकर बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं के आधार पर वाहन लोन हासिल किए। आधार और पैन कार्ड के विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ कि अलग-अलग नामों वाली सभी पहचान में तस्वीरें एक ही व्यक्ति की थीं।
सूचना के आधार पर अमन कुमार के तिलक नगर स्थित आवास पर छापा मारा गया, जहां से फर्जी दस्तावेज और वाहनों से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए। इसके बाद उसे 25 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी की पहचान अमन उर्फ श्याम सुंदर उर्फ राहुल कपूर (46) के रूप में हुई। वह दिल्ली के तिलक नगर का रहने वाला है। पुलिस की पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह कई वर्षों से फर्जी नाम, पते और पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। उसने जाली आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी आईटीआर के जरिए बैंक खाते खुलवाए, वाहन लोन लिए और बाद में वाहनों को बेच दिया। इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)/336/338/340/112/61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
इसी मामले में क्राइम ब्रांच ने 8 जनवरी को धीरज उर्फ आलोक उर्फ सिद्धार्थ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि वह अमन के साथ मिलकर आलोक और सिद्धार्थ जैसे फर्जी नामों से बैंक खाते खुलवाता था और उन्हीं खातों से वाहन लोन लेता था। बाद में वाहनों को बेच दिया जाता था। धीरज ने आगे बताया कि फर्जी आधार कार्ड नजफगढ़ स्थित साई दस्तावेज सेंटर से बनवाए जाते थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने दुकान पर पहुंचकर जांच की और दुकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में तीसरे आरोपी के रूप में 9 जनवरी को नरेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से मोबाइल फोन, आई स्कैनर, बायोमेट्रिक स्कैनर, वेब कैमरा और पीवीसी कार्ड मशीन बरामद की गई है।
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