निपाह वायरस की रोकथाम के लिए म्यांमार के यांगून एयरपोर्ट पर जांच कड़ी

यांगून, 2 फरवरी (khabarwala24)। म्यांमार ने निपाह वायरस के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए यांगून अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी को कड़ा कर दिया है। सरकारी अखबार द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने सोमवार को यह जानकारी दी।रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मौजूदा प्रकोप […]

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यांगून, 2 फरवरी (khabarwala24)। म्यांमार ने निपाह वायरस के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए यांगून अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी को कड़ा कर दिया है। सरकारी अखबार द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने सोमवार को यह जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मौजूदा प्रकोप को देखते हुए भारत से आने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया गया कि यात्रियों की जांच में बुखार और निपाह से जुड़े अन्य लक्षणों पर खास फोकस किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच उन निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत की जा रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति पैदा कर सकने वाली संक्रामक बीमारियों के लिए लागू होते हैं।

स्वास्थ्य जागरूकता के तहत यात्रियों को जानकारी देने वाले पर्चे वितरित किए जा रहे हैं और हवाई अड्डे पर पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा, हवाई अड्डे पर कार्यरत संबंधित विभागों के साथ समन्वय में रोग की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।

मंत्रालय ने बताया कि इसी तरह की सख्त निगरानी और जांच व्यवस्था मांडले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी लागू की गई है।

फिलहाल म्यांमार में निपाह वायरस के किसी भी संदिग्ध मामले की पुष्टि नहीं हुई है।

निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में और कुछ मामलों में इंसान से इंसान में फैल सकती है। इसकी महामारी फैलाने की क्षमता और गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे प्राथमिकता वाले रोगजनकों की श्रेणी में रखा है।

निपाह वायरस की पहली पहचान वर्ष 1998 में मलेशिया में सुअर पालकों के बीच हुए प्रकोप के दौरान हुई थी। 1999 में मलेशिया से बीमार सुअरों के आयात के बाद सिंगापुर में भी इसका प्रकोप दर्ज किया गया। इसके बाद से मलेशिया और सिंगापुर में कोई नया मामला सामने नहीं आया। वर्ष 2001 में भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस संक्रमण के प्रकोप सामने आए। बांग्लादेश में तब से लगभग हर साल इसके मामले दर्ज होते रहे हैं, जबकि भारत में भी समय-समय पर विभिन्न हिस्सों में इसके प्रकोप सामने आते रहे हैं, जिनमें 2026 का ताजा मामला शामिल है।

निपाह वायरस इंसानों के बीच भी फैल सकता है। यह संक्रमण स्वास्थ्य संस्थानों में और बीमार लोगों के परिवारजनों व देखभाल करने वालों के बीच निकट संपर्क के माध्यम से फैलने की पुष्टि हो चुकी है। अस्पतालों में भीड़भाड़, खराब वेंटिलेशन और संक्रमण रोकथाम उपायों के अपर्याप्त पालन से इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

वर्तमान में निपाह वायरस संक्रमण के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।

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