Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News हापुड़। उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ के जिलाध्यक्ष शरद कुमार गर्ग और महामंत्री योगेंद्र अग्रवाल ने जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों के शोषण पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में जिलाधिकारी द्वारा अर्वाचीन इंटरनेशनल स्कूल पर शुल्क नियामक समिति के माध्यम से लगाए गए जुर्माने को सराहनीय कदम बताया गया, लेकिन महासंघ ने कहा कि इससे संतुष्ट नहीं है क्योंकि यह समस्या केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है।
क्या है पूरा मामला (Hapur News)
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि कई निजी स्कूल अभी भी मनमानी फीस वृद्धि, किताबों, स्टेशनरी, कॉपियों, यूनिफॉर्म और अन्य मदों के नाम पर अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं। अभिभावक महासंघ का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर संभव तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मौका नहीं छोड़ते। महासंघ पिछले कई वर्षों से इस शोषण के खिलाफ निरंतर संघर्ष कर रहा है।
निगरानी समिति गठन की मांग (Hapur News)
अभिभावक महासंघ ने तुरंत एक निगरानी समिति गठित करने की मांग की है, जो विभिन्न निजी स्कूलों में मौके पर जाकर जांच करे और अपनी रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपे। इस समिति में उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी हो सके। बिना अभिभावकों की भागीदारी के जांच पर सवाल उठने की आशंका जताई गई है।
4 अप्रैल की बैठक का मुद्दा (Hapur News)
ज्ञापन में 4 अप्रैल को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक का जिक्र करते हुए बताया गया कि जिलाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को 7 दिनों के अंदर अपना रिवाइज्ड फीस स्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अभिभावक महासंघ ने पूछा कि अब तक कितने स्कूलों ने यह फीस स्ट्रक्चर जमा किया है और जिन्होंने नहीं किया, उनके खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है? यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने कुछ स्कूलों का रिवाइज्ड फीस स्ट्रक्चर उपलब्ध कराया, जबकि बाकी स्कूलों को 25 अप्रैल तक समय दिया गया है।
अभिभावकों की पीड़ा (Hapur News)
निजी विद्यालयों द्वारा फीस, किताबें, ड्रेस, स्टेशनरी आदि के नाम पर की जा रही मनमानी से अभिभावक काफी परेशान हैं। कई स्कूल अभिभावकों को अपनी तय दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे बाजार दर से कई गुना अधिक राशि वसूली जाती है। उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ का कहना है कि शुल्क नियामक अधिनियम 2018 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और दोषी स्कूलों पर त्वरित कार्रवाई हो।
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