मदनी को दूसरे धर्मों में हस्‍तेक्षप का अधिकार नहीं : स्‍वामी नारायण दास

ऋषिकेश, 27 जनवरी (khabarwala24)। उत्‍तराखंड में गंगोत्री धाम में गैर हिदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। श्री भरत मिलाप आश्रम के महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्‍होंने इस फैसले […]

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ऋषिकेश, 27 जनवरी (khabarwala24)। उत्‍तराखंड में गंगोत्री धाम में गैर हिदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। श्री भरत मिलाप आश्रम के महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्‍होंने इस फैसले को भेदभावपूर्ण और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।

महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि किसी को भी दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अरशद मदनी को यह सोचना चाहिए कि मक्का-मदीना में गैर-मुसलमान नहीं जाता। वहां केवल उनके धर्मावलंबी ही जाते हैं। ऐसे में किसी दूसरे धर्म के मानबिंदुओं और आस्थाओं में हस्तक्षेप करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।

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महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत में स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म के भीतर यदि किसी प्रकार के सुधार या बदलाव की आवश्यकता होगी, तो उसका निर्णय और व्यवस्था स्वयं साधु-संत करेंगे। यदि दूसरे धर्मों के लोग सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों में प्रवेश करेंगे, तो यह निश्चित रूप से विवाद का विषय बनेगा। धार्मिक स्थलों की पवित्रता और परंपरा की रक्षा करना आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गैर-हिंदुओं के मंदिरों में प्रवेश पर रोक केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे देश के सभी मंदिरों पर लागू किया जाना चाहिए। महंत ने दावा किया कि कई बार देखा गया है कि जब कोई गैर-हिंदू सनातन धर्म के मंदिरों में प्रवेश करता है, तो वहां अव्यवस्था फैलती है और मंदिर परिसर की शांति भंग होती है। ऐसे में धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं।

महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने वर्तमान विवाद और धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह कोई राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि धार्मिक सम्मान और आस्था से जुड़ा मामला है। जो लोग इस मुद्दे को राजनीति से जोड़ रहे हैं, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए।

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उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य आपस में बैठकर इस विषय पर कोई निर्णय लेते हैं, तो राजनीति करने वालों को कोई मौका ही नहीं मिलेगा।

महंत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति वही लोग कर रहे हैं, जिन्होंने पहले महाराज पर लाठी चलवाई थी और आज वही उनके शुभचिंतक बनने का दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि किसी की राजनीति से सनातन धर्म टूटने वाला नहीं है और यह धर्म अपनी परंपरा और मूल्यों के साथ हमेशा मजबूत बना रहेगा।

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