नई दिल्ली, 10 सितंबर (khabarwala24)। फिच रेटिंग्स के लेटेस्ट ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, भारत भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है और अगले तीन वर्षों में देश 6 प्रतिशत से ऊपर की विकास दर बनाए रखने का अनुमान है।
2025 की दूसरी तिमाही के मजबूत परिणाम को देखते हुए फिच ने मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए अपने पूर्वानुमान को जून की रिपोर्ट के 6.5 प्रतिशत से संशोधित कर 6.9 प्रतिशत कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग विकास का प्रमुख चालक होगी, क्योंकि मजबूत वास्तविक आय गतिशीलता उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देगी और लूजर फाइनेंशियल कंडीशन निवेश को बढ़ावा देगी।
फिच के नोट के अनुसार, भारत में वार्षिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 6.3 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है और अर्थव्यवस्था अपनी क्षमता से थोड़ा ऊपर चल रही है।
फिच ने कहा, हमें लगता है कि वित्त वर्ष 28 में वृद्धि दर घटकर 6.2 प्रतिशत रह जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है, हमें अब भी उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती करेगा, क्योंकि वह पहले से लागू की गई नीतिगत ढील के प्रभाव का आकलन कर रहा है और दरें 2026 के अंत तक स्थिर रहेंगी। इसके बाद हमें उम्मीद है कि आरबीआई 2027 में दरें बढ़ाना शुरू कर देगा।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने चीन और यूरोजोन के मजबूत आंकड़ों की मदद से 2025 के लिए अपने वैश्विक विकास अनुमान को बढ़ाकर 2.4 प्रतिशत कर दिया। साथ ही, चेतावनी भी दी कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में धीमी गति के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं।
चीन के विकास पूर्वानुमान को फिच के जून के पूर्वानुमान 4.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह यूरोजोन के विकास पूर्वानुमान को 0.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.1 प्रतिशत और अमेरिका के विकास पूर्वानुमान को 1.5 प्रतिशत से कुछ बढ़ाकर 1.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
वैश्विक विकास दर 2026 के लिए 2.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, यूएस टैरिफ वृद्धि काफी ज्यादा है और इसका प्रभाव ग्लोबल ग्रोथ में कमी के रूप में देखने को मिलेगा। अमेरिका में धीमी गति के प्रमाण अब केवल सेंटीमेंट सर्वे में सीमित न रहकर ठोस आंकड़ों में दिखाई दे रहे हैं।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व सितंबर और दिसंबर में 25 आधार अंकों की दो ब्याज दर कटौती करेगा। इसके बाद अगले वर्ष 2026 में तीन अतिरिक्त ब्याज दर कटौती की जाएगी।
फिच उम्मीद करता है कि 2025 के अंत में अमेरिका में कीमतों पर दबाव बढ़ेगा जिससे रियल वेज ग्रोथ पर अंकुश लगेगा और कंज्यूमर डिमांड कम होगी क्योंकि जॉब ग्रोथ पहले से ही धीमी हो रही है।
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Source : IANS
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