Khabarwala 24 Hapur News Meta CSAM Apology: सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जकरबर्ग ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट (CSAM/CSEAM), डीपफेक और एल्गोरिदम संचालन में हुई गंभीर गलतियों को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
इसके साथ ही भारतीय अधिकारियों और संसदीय समिति ने मेटा को कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) की परिभाषा के तहत नहीं आती है, इसलिए उसे आईटी कानून (IT Act) के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) का कानूनी संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
यह दूसरा मौका है जब मेटा प्रबंधन की ओर से इस प्रकार माफी मांगी गई है। इससे पहले जनवरी 2025 में भी संसदीय समिति के समक्ष मेटा अधिकारियों ने अपनी चूकों पर खेद व्यक्त किया था।
‘पैसों के लिए खास कंटेंट को दिया बढ़ावा’, मेटा ने स्वीकारी गलती
समीक्षा और पूछताछ के दौरान मेटा ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि कुछ विशेष प्रकार की श्रेणियों वाले कंटेंट और विज्ञापनों को बढ़ावा देने के लिए कंपनी को भारी रकम (मोटा पैसा) मिली थी। मार्क जकरबर्ग और मेटा प्रबंधन ने इस फैसले और चूक पर गहरा अफसोस जताते हुए अपनी गलती मानी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने अपनी टीम के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। करीब आधे घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक से पहले मेटा प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन से भी भेंट की।
क्यों छिनेगी ‘सेफ हार्बर’ की कानूनी सुरक्षा?
‘सेफ हार्बर’ एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो इंटरनेट और सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर थर्ड-पार्टी यूज़र्स द्वारा पोस्ट की जाने वाली जानकारियों के प्रति सीधी कानूनी जवाबदेही से सुरक्षा देता है।
हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने मेटा को साफ कर दिया कि कंपनी का एल्गोरिदम खुद तय करता है कि कौन सा कंटेंट किसे और कितना दिखेगा। यानी मेटा सिर्फ एक बिचौलिया न होकर कंटेंट के वितरण को नियंत्रित करती है। इसलिए कंपनी पर सेफ हार्बर का नियम लागू नहीं होता और आपत्तिजनक सामग्री के लिए कंपनी सीधे तौर पर कानूनी रूप से जवाबदेह होगी।
NCPCR का नोटिस और संसदीय समिति का कड़ा रुख
इस पूरे मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 3 जुलाई, 2026 को एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा को नोटिस जारी किया था, जिसमें चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल से जुड़े विज्ञापनों का जिक्र था। मेटा के जवाब से असंतुष्ट आयोग ने जांच के रास्ते तलाशने की बात कही थी।
इसके बाद, 3 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मामलों की संसदीय समिति की बैठक में चेयरमैन निशिकांत दुबे के नेतृत्व में समिति ने मेटा समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को महिलाओं व बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर कड़ी फटकार लगाई थी और सेफ हार्बर निरस्त किए जाने की संभावनाओं पर बल दिया था।
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