अस्पताल की लापरवाही से नवजात की मौत, पिता को गत्ते में शव ले जाना पड़ा

चाईबासा, 8 मार्च (khabarwala24)। झारखंड के पश्चिमी चाईबासा जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में कथित लापरवाही का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में रखकर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना की तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र […]

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चाईबासा, 8 मार्च (khabarwala24)। झारखंड के पश्चिमी चाईबासा जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में कथित लापरवाही का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में रखकर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना की तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र में गहरा आक्रोश और दुख का माहौल है।

कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी।

परिजनों के मुताबिक नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिवार को किसी तरह की मदद देने के बजाय शव को जल्द अस्पताल से हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम ने बच्चे के शव को घर तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की, तो उन्हें कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। आर्थिक तंगी और मजबूरी के कारण अंततः पिता को गत्ते के डिब्बे में नवजात के शव को रखना पड़ा और उसी हालत में वह उसे लेकर अपने गांव के लिए निकल पड़े।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के साथ अक्सर उपेक्षा का व्यवहार किया जाता है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन चाहता तो मानवता के नाते एम्बुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था।

ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की भी मांग उठाई है।

इस मामले में चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार की ओर से शव को घर ले जाने के लिए किसी प्रकार की सहायता की मांग नहीं की गई थी। अगर परिवार अस्पताल प्रशासन से संपर्क करता तो ममता वाहन के जरिए शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में यह स्थिति उत्पन्न हुई और इस घटना से वे भी दुखी हैं। साथ ही, उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से अस्पताल में इलाज के दौरान अपनी समस्याएं डॉक्टरों को बताने की अपील की है ताकि समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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