Khabarwala 24 News Lucknow: UP News उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर महीनों से चल रहे विवाद और जन आक्रोश के बीच योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रीपेड मीटर व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। पहले से लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब पोस्टपेड में बदल दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसकी आधिकारिक घोषणा की। इस बदलाव से लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
नए बिलिंग नियम और समयसीमा (UP News)
सरकार ने बिजली बिलिंग को और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त समयसीमा तय की है। अब हर महीने की 10 तारीख तक बिजली का बिल उपभोक्ताओं को उपलब्ध करा दिया जाएगा। बिल जमा करने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा, यानी 25 तारीख तक बिल का भुगतान करना होगा।
एक बड़ी राहत यह है कि यदि केवल एक महीने का बकाया रहता है तो बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को अचानक अंधेरे में रहने की समस्या से निजात मिलेगी। पुराने बकाये को भी किस्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है, ताकि उपभोक्ताओं पर एक साथ बोझ न पड़े।
सिक्योरिटी मनी की चार किस्तों में व्यवस्था (UP News)
प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी जमा नहीं करनी पड़ती थी, जबकि पोस्टपेड में यह अनिवार्य है। जब पहले प्रीपेड में बदला गया था तो पुरानी सिक्योरिटी राशि वापस कर दी गई थी। अब दोबारा पोस्टपेड करने पर उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी जमा करनी होगी।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सिक्योरिटी राशि एकमुश्त नहीं, बल्कि चार किस्तों में ली जाए। इससे उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ कम होगा। यह व्यवस्था आम जनता को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
बिल समय पर न मिले तो क्या करें? शिकायत व्यवस्था (UP News)
यदि बिल 10 तारीख तक नहीं मिलता है तो उपभोक्ता आसानी से शिकायत कर सकेंगे।
- संबंधित वितरण कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर कनेक्शन नंबर बताकर बिल मंगवाया जा सकता है।
- टोल-फ्री नंबर 1912 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- खंड और उपखंड स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे, जहां बिल संबंधी सभी समस्याओं का तुरंत निपटारा किया जाएगा।
प्रीपेड मीटर विवाद की पृष्ठभूमि (UP News)
पिछले कई महीनों से यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरन लगाए जा रहे थे। उपभोक्ताओं की शिकायत थी कि अचानक रिचार्ज खत्म होने से बिजली चली जाती है और रिचार्ज करने में परेशानी होती है। कई जगहों पर लोगों ने मीटर उखाड़कर फेंक दिए, जिस पर मुकदमे भी दर्ज हुए।
केंद्रीय स्तर पर स्पष्ट था कि उपभोक्ता को प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का अधिकार है। विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की अधिसूचना में भी यह व्यवस्था है। इसके बावजूद यूपी में जबरदस्ती प्रीपेड लगाने की शिकायतें लगातार आ रही थीं। चुनावी साल में जन आक्रोश को देखते हुए सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
अवधेश कुमार वर्मा का बयान और मांग (UP News)
प्रीपेड मीटर के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने मीटर उखाड़ने के आरोप में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। वर्मा ने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन शुरू से ही उपभोक्ता हित में फैसला लेता तो ऐसी स्थिति नहीं आती।
इस बदलाव का उपभोक्ताओं पर प्रभाव (UP News)
यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए राहत भरा है जिनके घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके थे। अब उन्हें रिचार्ज की टेंशन नहीं रहेगी। बिल समय पर आएगा और भुगतान की पर्याप्त समयसीमा मिलेगी। पुराने बकाये और सिक्योरिटी की किस्त व्यवस्था से आर्थिक दबाव भी कम होगा।
हालांकि, पहले लगाए गए स्मार्ट मीटरों में बिल ज्यादा आने की शिकायतों पर अभी स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। सरकार को इस दिशा में भी पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
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