स्ट्रोक से जान बचाने में बेहद कारगर ‘फास्ट’ फॉर्मूला, समझें यहां

नई दिल्ली, 11 जनवरी (khabarwala24)। इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग का मात्र 43 वर्ष की उम्र में स्ट्रोक से निधन हो गया है। यह दुखद घटना एक बार फिर स्ट्रोक के खतरों की याद दिलाती है। ऐसे में स्ट्रोक से जागरुकता ही बचाव है।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ऐसे […]

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (khabarwala24)। इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग का मात्र 43 वर्ष की उम्र में स्ट्रोक से निधन हो गया है। यह दुखद घटना एक बार फिर स्ट्रोक के खतरों की याद दिलाती है। ऐसे में स्ट्रोक से जागरुकता ही बचाव है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ऐसे समय में लोगों को जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण सलाह ‘फास्ट’ के रूप में दी है। स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर पीड़ित की जान बचाई जा सकती है।

स्ट्रोक को ब्रेन अटैक भी कहा जाता है। यह तब होता है जब दिमाग तक खून और ऑक्सीजन पहुंचने में अचानक रुकावट आ जाती है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं, इस्केमिक स्ट्रोक (खून का थक्का बनने से) और हेमोरेजिक स्ट्रोक (रक्त वाहिका फटने से)। कभी-कभी मिनी स्ट्रोक भी होता है, जो कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन यह बड़ा स्ट्रोक आने का संकेत हो सकता है।

आयुष मंत्रालय स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों को याद रखने के लिए आसान फॉर्मूला ‘फास्ट’ के बारे में बताता है। यह फॉर्मूला जान बचाने में बहुत कारगर है। फास्ट को ऐसे समझें-

एफ- फेस :- क्या मुस्कान फीकी पड़ गई है? क्या चेहरा एक तरफ झुक रहा है?

ए- आर्म्स:- दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें। क्या एक हाथ नीचे गिर रहा है या कमजोर है?

एस – स्पीच :- क्या बोलना अस्पष्ट, टेढ़ा-मेढ़ा या अजीब लग रहा है?

‘टी – टाइम:- जैसे ही ये लक्षण दिखें, बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचें।

आयुर्वेद में स्ट्रोक को मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से जुड़ा न्यूरोलॉजिकल रोग माना जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे रोकने के लिए वात को संतुलित रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, जिसमें नियमित दिनचर्या, सुबह जल्दी उठना और रात को समय पर सोना शामिल है।

संतुलित आहार लें, जिसमें गर्म, ताजा, पौष्टिक भोजन जैसे दालें, सब्जियां, सूप और घी-तेल युक्त चीजें हों, जबकि ठंडा, सूखा, तला-भुना या बासी भोजन से परहेज करें। रोजाना समय पर भोजन करें और कभी भूखा न रहें। नियमित हल्का व्यायाम या योग करें तथा तिल के तेल से शरीर की मालिश (अभ्यंग) करें, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और वात शांत रहता है।

इसके साथ ही तनाव को कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम या गहरी सांस लेने की आदत डालें और धूम्रपान, शराब से पूरी तरह दूर रहें। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों को नियंत्रण में रखें।

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