CJP Protest हमारे पास समय नहीं है…’ – छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Khabarwala 24 News New Delhi: CJP Protest राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के बीच जंतर-मंतर और सड़कों पर बवाल मचा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए कथित पुलिस एक्शन और बर्बरता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत […]

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Khabarwala 24 News New Delhi: CJP Protest राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के बीच जंतर-मंतर और सड़कों पर बवाल मचा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए कथित पुलिस एक्शन और बर्बरता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में दखल देने से साफ़ इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी से प्रदर्शनकारी छात्रों में नाराजगी और बढ़ने के आसार हैं।

‘हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है’ (CJP Protest)

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकीलों ने पुलिस की ओर से की गई कथित ज्यादती और बर्बरता के वीडियो साक्ष्य के तौर पर दिखाने की अनुमति मांगी। इस पर देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “हमारा समय बर्बाद न करें।”

सीजेआई ने वकीलों की दलीलों को खारिज करते हुए आगे कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, और हमारे पास इन्हें देखने का समय नहीं है।” इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल (CJP Protest)

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में सोनम वांगचुक सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से जबरन हटाने, गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने और मारपीट के आरोपों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से अपील की है कि: (CJP Protest)

शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।

  • जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे लोगों को पुलिस द्वारा बेवजह परेशान न किया जाए।
  • पुलिस द्वारा बिना किसी ठोस कारण के शांतिपूर्ण आंदोलन में हस्तक्षेप न किया जाए और केवल कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई हो।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट इस संवेदनशील याचिका पर क्या रुख अपनाता है।
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