उज्जैन, 17 मार्च (khabarwala24)। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि मंगलवार के अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली। पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।
महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही कतारबद्ध होने लगे थे। अपने आराध्य बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को जगाने के लिए सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए।
इसके पश्चात, भगवान का अत्यंत अलौकिक शृंगार किया गया। तत्पश्चात विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें भस्म अर्पित कर महादेव का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से इस अलौकिक क्षण के दर्शन किए। संपूर्ण मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान था और वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। लगभग दो घंटे चली इस आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु का शृंगार साथ-साथ चलता रहा।
महाकाल की यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है। पंचामृत से उनका पूजन और पवित्र भस्म से विशेष स्नान करवाया गया।
इसके पश्चात बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया, जिसकी छटा देखते ही बनती थी। भगवान के मुखारविंद को अत्यंत मनमोहक रूप में सजाया गया; उनके मस्तक पर स्पष्ट त्रिपुंड और ‘ॐ’ अंकित कर नवीन मुकुट धारण कराया गया। शृंगार में ताजे बिल्वपत्र और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाओं का प्रयोग कर इस अलौकिक दृश्य को और भी भव्य बनाया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
उल्लेखनीय है कि भस्म आरती के लिए प्रयुक्त पवित्र भस्म कपिला गाय के गोबर से निर्मित कंडों के साथ-साथ शमी, पीपल, पलाश, वट, अमलतास और बेर की लकड़ियों को प्रज्वलित कर विशेष विधि से तैयार की जाती है।
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