Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News हापुड़। उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ की एक विशेष अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक मामले में त्वरित न्याय करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) ज्ञानेन्द्र सिंह यादव की अदालत ने चार वर्षीय मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सागर जोशी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला (Hapur News)
इस बेहद संवेदनशील मामले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि यह पूरी घटना गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र की है। पीड़ित परिवार की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, 8 मार्च 2025 की शाम को उनकी करीब चार साल की मासूम बेटी घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रही थी। जब काफी देर तक बच्ची वापस नहीं लौटी, तो मां ने उसकी तलाश शुरू की। पड़ोस की एक महिला ने बताया कि मोहल्ले का ही रहने वाला सागर जोशी बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है।
कोतवाली पहुंचकर की शिकायत (Hapur News)
मां जब अपनी बेटी को ढूंढती हुई सागर जोशी के घर पहुंची, तो मासूम बच्ची वहां बेहद डरी और सहमी हुई हालत में मिली। मां द्वारा प्यार से पूछने पर मासूम ने अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि सागर ने उसके साथ गलत काम किया है। जब पीड़िता की मां ने आरोपी का विरोध किया, तो सागर जोशी ने पूरे परिवार को जान से मारने और इलाके से बाहर निकलवाने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता की मां दवाई लेने के बहाने घर से निकली और सीधे गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली पहुंचकर आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार (Hapur News)
तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने आरोपी सागर जोशी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया था और मामले की गहन जांच कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने अदालत के समक्ष पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा। बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयानों को सुनने के बाद अदालत ने सागर जोशी को दोषी पाया।
न्यायाधीश ने सुनाई सजा (Hapur News)
न्यायाधीश ने दोषी सागर जोशी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास और धारा 5-एम/6 पोक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। अदालत ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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