देहरादून, 21 मार्च (khabarwala24)। उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश के विकास के लिए अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इस संतुलन को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने ‘नेचर-फर्स्ट’ यानी प्रकृति को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता बताई और कहा कि केवल प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखा जा सकता है।
उन्होंने वन संरक्षण के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 की तुलना में देश का वन क्षेत्र 13,669 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। 2014 में जहां वन क्षेत्र 7,01,673 वर्ग किलोमीटर था, 2026 में बढ़कर 7,15,342 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसके साथ ही वन और पेड़ों के जरिए कार्बन सिंक भी बढ़ा है, जो 2014 में 1.97 बिलियन टन सीओटू था और अब 2026 में बढ़कर 2.29 बिलियन टन सीओटू हो गया है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, वन एवं पर्यावरण विभाग से जुड़े विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों की बड़ी भागीदारी रही। वन अनुसंधान संस्थान और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “जैसे ही हम ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस’ मना रहे हैं, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अपने वन क्षेत्र का विस्तार कर रहा है, साथ ही विभिन्न भू-परिदृश्यों में वनीकरण को बढ़ावा दे रहा है और वन संरक्षण को सुदृढ़ कर रहा है।”
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