2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को पाने के लिए सरकार महत्वपूर्ण मिश्रित फाइनेंस मैकेनिज्म को दे रही बढ़ावा : भूपेंद्र यादव

नई दिल्ली, 11 सितंबर (khabarwala24) । केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को कहा कि भारत को अपने नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2070 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में देश ब्लेंडेड फाइनेंस मैकेनिज्म को बढ़ावा दे रहा […]

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नई दिल्ली, 11 सितंबर (khabarwala24) । केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को कहा कि भारत को अपने नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2070 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में देश ब्लेंडेड फाइनेंस मैकेनिज्म को बढ़ावा दे रहा है, जो रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी एफिशिएंसी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वेस्ट-टू-वेल्थ, नेचर-बेस्ड सॉल्यूशन में निजी निवेश को बढ़ाने और जोखिम मुक्त बनाने के लिए सार्वजनिक धन का इस्तेमाल करेगा।

भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय इवेंट फिक्की लीड्स में केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि 21वीं सदी भारत जैसे देशों के लिए दोहरी जिम्मेदारी लाती है, जिसमें एक युवा और महत्वाकांक्षी आबादी की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को होने वाली क्षति से ग्रह की रक्षा करना शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने महत्वाकांक्षा, इनोवेशन और बदलाव का मार्ग चुना है।

उन्होंने आर्थिक विकास और इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी दोनों को आगे बढ़ाने की भावना के लिए उद्योग की सराहना की।

ग्रीन फाइनेंसिंग पर अपनी स्पीच देते हुए केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण का मार्ग प्रगति और लाभ को सस्टेनेबिलिटी से जोड़ने पर आधारित है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार, उद्योग, रेगुलेटर, वैश्विक वित्तीय संस्थानों और नागरिकों के बीच समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करते हुए सहयोगात्मक विकास क्लामेट चेंज की चुनौतियों का सामना करने की कुंजी है।

केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ती वैश्विक तापमान सीमाएं न केवल क्लाइमेट साइंस को दिखाती हैं बल्कि अनसस्टेनेबल विकास के परिणामों को भी दिखाती है।

केंद्रीय मंत्री ने उद्योगों से आग्रह किया कि उन्हें न केवल अपने लाभों के प्रति सचेत रहना चाहिए बल्कि उनके पीछे छिपी पर्यावरणीय लागतों के प्रति भी सचेत रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रीन फाइनेंसिंग को एक प्रतिस्पर्धी और मजबूत अर्थव्यवस्था के रीढ़ के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीन फाइनेंसिंग को ऐसा इकोनॉमिक सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें विकास इकोलॉजी के कल्याण के साथ-साथ कम्युनिटी की हेल्थ से जुड़ा हो।

केंद्रीय मंत्री यादव ने निवेश में विश्वास पैदा करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी करने को भारत की हरित विकास क्षमता में दृढ़ विश्वास का प्रमाण बताया।

केंद्रीय मंत्री यादव ने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के बारे में बात की। यह प्रोग्राम अक्टूबर 2023 में लॉन्च किया गया था, जिसे इको-रिस्टोरेशन जैसे सकारात्मक पर्यावरणीय कार्य के लिए प्रोत्साहित करने के एक इनोवेटिव इंस्ट्रूमेंट के रूप में पेश किया गया था।

केंद्रीय मंत्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि इस बदलाव के लिए फाइनेंसिंग मेकेनिज्म को समावेशिता सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे एमएसएमई, किसानों और कमजोर समुदायों को लाभ मिल सके।

एसकेटी/

Source : IANS

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