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टोल के झंझट खत्म कर खुश कर देगी New Toll Policy, जानिए नई टोल नीति में क्या है खास

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Khabarwala 24 News New Delhi : नई टोल नीति (New Toll Policy) टोल की झंझटों को खत्म करने के साथ सभी को खुश कर देगी। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) की इस घोषणा के बाद बजट सत्र में सवाल-जवाब और बढ़ गया है। आम जनता के साथ-साथ सांसदों में भी इसकी बेचैनी है।

लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य सड़क परिवहन मंत्रालय में इसकी पूछताछ कर रहे हैं कि नई टोल नीति (New Toll Policy) कब से लागू होगी। हाईवे और एक्सप्रेस वे पर टोल से कमाई में केंद्र सरकार के साथ राज्यों की कमाई भी बढ़ रही है, लेकिन टोल ऑपरेटरों और उनके कर्मियों में कार्यकुशलता की कमी और तकनीक अपडेट करने में ढिलाई के कारण टोल प्लाजा अव्यवस्थाओं और लोगों की परेशानी के ठिकाने बने हुए हैं।

वित्तीय वर्ष में टोल से वसूली 61000 करोड़ रुपये

31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में टोल से वसूली 61000 करोड़ रुपये से अधिक रही। इसके पहले वाले साल के मुकाबले यह दस प्रतिशत यानी लगभग 6100 करोड़ रुपये अधिक है। हाईवे और एक्सप्रेस वे के माध्यम से राज्यों की एजेंसियों का हिस्सा 11000 करोड़ रहा। इस तरह एनएच, एक्सप्रेस वे और राज्यों के राजमार्गों पर फास्टैग के माध्यम से टोल संग्रह 72000 करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा है।

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टोलिंग व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया बहुत धीमी

टोल संग्रह में यह बढ़ोतरी शुल्क में वृद्धि के साथ ही टोल वाली सड़कों का दायरा बढ़ने का परिणाम है। केवल पिछले साल 4700 किलोमीटर के ऐसे एनएच और एक्सप्रेस वे बढ़े जिनमें टोल वसूलने की शुरुआत हुई। यह सिलसिला नए हाईवे और एक्सप्रेस वे बढ़ने के साथ मौजूदा सड़कों को और चौड़ा करने की योजनाओं के साथ और तेजी से बढ़ने के आसार हैं। लेकिन इसके अनुपात में टोलिंग व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया बहुत धीमी है।

नई टोल व्यवस्था (New Toll Policy) में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल

नई टोल नीति (New Toll Policy) पर तीन साल से काम चल रहा है। नई टोल नीति पर अमल से पहले मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली में तकनीक के उन्नयन की भी तैयारी की है। एनएच प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार पहले चरण में जिन एनएच और एक्सप्रेस वे में टोल प्लाजा समाप्त किए जाने हैं, उनमें कैमरों को बदलने का काम शुरू हो गया है। अब जो कैमरे लगेंगे, वे 70-80 मीटर की दूरी से नंबर प्लेट स्कैन के साथ गति सीमा और ट्रैफिक उल्लंघन के मामलों को नोट करेंगे।

कैमरों और सेंसरों को बदलने का चल रहा काम

नंबर प्लेट आधारित टोल वसूली वाली प्रणाली के पायलट प्रोजेक्टों में इन कैमरों की क्षमता परखी गई है। इनकी मदद से सीट बेल्ट न पहनने, उल्टी दिशा में वाहन चलाने और मोबाइल पर बात करने के मामले रिकार्ड किए गए। नई टोल नीति (New Toll Policy) में नए सिस्टम में तकनीक की समस्या नहीं आएगी, क्योंकि कैमरों और सेंसर बदलने का काम छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही राज्यों से भी कहा गया है कि वे एक्सप्रेस वे और हाईवे की इलेक्ट्रानिक निगरानी तय मानकों के अनुरूप करें।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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