Khabarwala24 Hapur News: जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान पैलेट गन का शिकार हुए युवा साहिल लोहबच को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि छात्र की आंख की रोशनी जाने और शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने के बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है।
साहिल को साथ लेकर डीसीपी दफ्तर पहुंचे राहुल गांधी (Delhi News)
पूरा मामला दिल्ली के कनॉट प्लेस से सटे संसद मार्ग थाने और डीसीपी कार्यालय का है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुए बल प्रयोग की जांच की स्थिति जानने पहुंचे थे। उनके साथ पैलेट गन से गंभीर रूप से घायल हुआ युवक साहिल लोहबच और उसके माता-पिता भी मौजूद थे।
राहुल गांधी ने हाल ही में पदभार संभालने वाली दिल्ली पुलिस की संयुक्त आयुक्त (Joint CP) नूपुर प्रसाद से मुलाकात की। राहुल अपने साथ साहिल के मेडिकल कागजात, एम्स की जांच रिपोर्ट और लिखित शिकायतें लेकर पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से साफ शब्दों में पूछा कि इस गंभीर अपराध में अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई है।
जब पुलिस ने नहीं दर्ज की एफआईआर, तो थाने के बाहर जम गए राहुल (Delhi News)
पुलिस अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में जब तुरंत एफआईआर दर्ज करने पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो राहुल गांधी डीसीपी दफ्तर से बाहर निकल आए। उन्होंने थाने के ठीक बाहर अपनी कुर्सी लगवाई और वहीं जमीन पर समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी के अचानक धरने पर बैठते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते थाने के बाहर भारी पुलिस बल, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया का जमावड़ा लग गया। इस बात की खबर फैलते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेता भी राहुल गांधी के समर्थन में संसद मार्ग थाने पहुंचने लगे।
प्रियंका गांधी से लेकर दिग्गज कांग्रेस नेता पहुंचे मौके पर (Delhi News)
राहुल गांधी के धरने की खबर मिलते ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं का घटनास्थल पर जुटना शुरू हो गया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहुल के बगल में बैठकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
उनके अलावा लोकसभा में विपक्ष के पूर्व नेता अधीर रंजन चौधरी, वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला और कुमारी शैलजा समेत दर्जनों सांसद और पदाधिकारी थाने के बाहर डट गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
‘एम्स की रिपोर्ट में 200 छर्रे, आंख की रोशनी गई’ — राहुल गांधी का बड़ा दावा (Delhi News)
धरने पर बैठे राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए पूरे घटनाक्रम और पीड़ित साहिल की मेडिकल स्थिति का खुलासा किया। राहुल गांधी ने बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई थी।
राहुल ने एम्स (AIIMS) की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि साहिल के शरीर के अंदर इस वक्त 200 से ज्यादा छर्रे धंसे हुए हैं। छर्रा लगने के कारण साहिल की एक आंख की रोशनी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और डॉक्टर अब उस आंख को ठीक नहीं कर सकते। इसके अलावा, साहिल के दिल के बेहद करीब भी कई छर्रे मौजूद हैं, जिन्हें सर्जरी करके निकालना जानलेवा हो सकता है।
‘ऊपर से आदेश है कि एफआईआर दर्ज न हो’ (Delhi News)
राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया, तो अधिकारियों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन नहीं चलाई। राहुल ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर पुलिस ने गोलियां या छर्रे नहीं चलाए, तो फिर नई दिल्ली के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में खुलेआम किसी नागरिक पर छर्रे किसने चलाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि थाने के अंदर मौजूद अधिकारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि ‘ऊपर से सख्त आदेश’ हैं कि इस मामले में किसी भी कीमत पर एफआईआर (FIR) दर्ज न की जाए। राहुल ने कहा कि देश के बीचों-बीच, सबके सामने एक छात्र को अपाहिज बना दिया गया और सरकार मामले को दबाने में लगी है।
LIVE: Media Bite | Parliament Street Police Station, New Delhi https://t.co/Fvf6NxHxqy
\— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 21, 2026
जब तक एफआईआर नहीं, तब तक पीछे नहीं हटेंगे (Delhi News)
राहुल गांधी ने मीडिया और जनता के सामने अपनी मुख्य मांग रखते हुए कहा कि जब तक साहिल लोहबच की शिकायत पर आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं होती और जांच अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक वह थाने के बाहर से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भारत में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने वाले युवाओं पर गोलियां बरसाई जाएंगी? साहिल की मां ज्योति और पिता दीपक भी राहुल गांधी के साथ धरने पर बैठे रहे और अपनी संतान के लिए न्याय की गुहार लगाते दिखे।
दिल्ली पुलिस का पक्ष: क्राइम ब्रांच और सुप्रीम कोर्ट कमेटी कर रही जांच (Delhi News)
पूरे विवाद पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार की तरफ से शिकायत ले ली गई है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि जंतर-मंतर पर हुई इस पूरी हिंसा और बल प्रयोग की जांच पहले से ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) द्वारा की जा रही है।
इसके अलावा, पुलिस प्रशासन का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High Powered Enquiry Committee) का गठन किया जा चुका है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट और निर्देशों के आने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सड़क से संसद तक लड़ाई: बैकफुट पर लाने की रणनीति (Delhi News)
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी का यह कदम महज एक थाने का घेराव नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के खिलाफ कांग्रेस की एक सुविचारित रणनीति है। इससे पहले भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ चुके हैं, जहां से पुलिस को उन्हें हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले जाना पड़ा था।
अब एक बार फिर राहुल गांधी सीधे पुलिस मुख्यालय और गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस को घेर रहे हैं। छात्रों, युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाकर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह युवाओं के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक सीधी लड़ाई लड़ने को तैयार है।
जानिए क्या है पूरा जंतर-मंतर पैलेट गन मामला? (Delhi News)
इस पूरे विवाद की शुरुआत 20 जून को हुई थी, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। 20 जुलाई को जब छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हो गई।
इसी झड़प के दौरान कथित रूप से पैलेट गन और अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जिसमें साहिल समेत कई छात्र घायल हुए थे। हालांकि, बाद में 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से हटने के बाद यह आंदोलन समाप्त घोषित कर दिया गया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद थमा नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी (Delhi News)
जंतर-मंतर पर हुई हिंसा और पुलिस द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के मामले का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को एक अहम आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 5 सदस्यीय हाई पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया है।
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एल आर बिश्नोई को शामिल किया गया है। यह कमेटी पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा—दोनों पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।
दिल्ली पुलिस के लिए बढ़ीं मुश्किलें, स्थिति तनावपूर्ण (Delhi News)
संसद मार्ग थाने के बाहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के धरने पर बैठने से दिल्ली पुलिस की प्रशासनिक मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। लुटियंस दिल्ली के इतने संवेदनशील इलाके में शीर्ष विपक्षी नेताओं का इस तरह सड़कों पर बैठना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।
फिलहाल संसद मार्ग थाने के आसपास बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और अतिरक्ट पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज करती है या फिर राहुल गांधी को हिरासत में लेने जैसा कोई बड़ा कदम उठाती है।
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