भोपाल, 21 मार्च (khabarwala24) । मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू हो गया है। इस अभियान के तहत तमाम जल संरचनाओं की तस्वीर बदलने की कवायद जोर पकड़ रही है। इस अभियान में राज्य सरकार के 18 विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। राज्य के जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा जल स्रोतों को संरक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से गांव-गांव में तालाब, कुएं, चेकडेम और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है।
मोहन यादव सरकार ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कार्य आरंभ किए है। शासन के 18 विभाग की अभियान में सहभागिता हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अभियान’ को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के सह-नोडल विभाग बनाया गया है।
“जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत समाज की भागीदारी और विभिन्न सहभागी विभागों के माध्यम से नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संवर्धन, जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई व मरम्मत तथा नवीनीकरण, जल संग्रहण संरचनाओं के अतिक्रमण हटाने के कार्य अभियान में किये जायेंगे। स्कूलों में पेयजल गुणवत्ता परीक्षण, आंगनवाड़ियों तथा औद्योगिक इकाईयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य भी किए जाएंगे।
जल स्त्रोतों में प्रदूषण के स्तर को कम करने, जल स्त्रोतों तथा जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई की जायेगी। राजस्व रिकार्ड में जल संग्रहण संरचनाओं व नहरों को अंकित करने और मानसून सत्र में किये जाने वाले पौधारोपण के लिए आवश्यक तैयारियों के कार्य किये जाएंगे। नगरीय विकास विभाग द्वारा निकायों में अमृत 2.0 अंतर्गत जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, नदियों में मिलने नालों के शोधन की कार्य योजना बनाई गई है। तालाब, नदी, बावड़ी के संवर्धन एवं अतिक्रमण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित कराने के साथ हरित क्षेत्र विकसित किए जाएगे। जल संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के लिए अमृत मित्र बनाकर ‘माय भारत’ पोर्टल पर पंजीकरण किए जाएंगे। नगरीय निकायों के प्रमुख स्थलों पर गर्मियों में पेय जल सुविधा के लिए जनसहयोग से सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्था करना जैसे कार्य भी किए जाएंगे।
अभियान में वन विभाग द्वारा जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना के तहत लगभग सवा लाख हेक्टेयर में भूजल संवर्धन के कार्य, कृषि विभाग द्वारा बलराम तालाब और लाइन फार्म पोंड का निर्माण और पर्यावरण विभाग द्वारा विशेष तौर पर बेतवा, क्षिप्रा, कान्ह और गंभीर नदियों के उद्गम से अंतिम सीमा तक सर्वेक्षण कर दूषित जल के मिलने के स्थानों का चिन्हांकन किया जाएगा। इसी तरह अन्य विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई है।
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