श्रीलंका: ‘ईंधन संकट’ से बचाव का उपाय: बुधवार को स्कूल-दफ्तर रहेंगे बंद, सड़क पर दिखेंगे सीमित वाहन

कोलंबो, 17 मार्च (khabarwala24)। पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन सप्लाई को लेकर कई देश चिंतित हैं। कहीं मंत्रियों और आला अधिकारियों के वेतन में कटौती की जा रही है, और कहीं सरकारी महकमों में लिफ्ट पर पाबंदी लगा दी गई है। श्रीलंका सरकार ने बड़ा फैसला लिया और हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम […]

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कोलंबो, 17 मार्च (khabarwala24)। पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन सप्लाई को लेकर कई देश चिंतित हैं। कहीं मंत्रियों और आला अधिकारियों के वेतन में कटौती की जा रही है, और कहीं सरकारी महकमों में लिफ्ट पर पाबंदी लगा दी गई है। श्रीलंका सरकार ने बड़ा फैसला लिया और हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम का ऐलान किया। सरकार के निर्देशानुसार, बुधवार को ज्यादातर स्कूल और दफ्तर बंद रहेंगे, तो वहीं इस दिन सार्वजनिक वाहन भी सड़कों पर कम दौड़ेंगे।

आवश्यक सेवा आयुक्त जनरल प्रभात चंद्रकीर्ति ने सोमवार को कहा कि श्रीलंका में बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है और इस दिन सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी सीमित रहेंगी।

इस फैसले पर बात करते हुए, चंद्रकीर्ति ने कहा कि यह कदम सरकारी कार्यालयों के बंद रहने और इन दिनों स्कूलों से छात्रों की अनुपस्थिति के अनुरूप है।

उन्होंने आगे कहा कि निजी क्षेत्र से भी बुधवार को आवागमन कम करने का अनुरोध किया गया है। सीलोन चैंबर ऑफ कॉमर्स और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ सीलोन के साथ चर्चा की गई है, जिसमें निजी क्षेत्र के संस्थानों से आग्रह किया गया है कि जहां भी संभव हो, ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ (घर से काम करने) की व्यवस्था की अनुमति दें। उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक परिवहन की मांग में काफी कमी आएगी।

चंद्रकीर्ति ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सीमित रहेंगी,” और सलाह दी कि जनता को इनका उपयोग केवल आवश्यक यात्रा के लिए ही करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्पतालों तक जाने जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इससे पहले, सरकार के एक नए निर्देश के बाद, अब पूरे देश में इंटरनेशनल स्कूलों, निजी विश्वविद्यालयों और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर्स के छात्रों की बुधवार को छुट्टी रहेगी।

श्रीलंका के प्रमुख दैनिक ‘डेली मिरर’ ने मंत्रालय के हवाले से बताया कि, भविष्य के ऊर्जा संकट से बचाने की मुहिम के तहत ये कदम उठाया गया है। सरकार का तर्क है कि अगर अभी से इस पर नियंत्रण कर लिया तो आगे चलकर आवश्यक सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं पैदा होगा।

शिक्षा, उच्च शिक्षा और वोकेशनल शिक्षा मंत्रालय ने सभी प्रभावित संस्थानों से अपने शेड्यूल में बदलाव करने और इस फैसले का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि सप्ताह के बीच में यह छुट्टी एक अस्थायी उपाय है, जिसे राष्ट्रीय ऊर्जा-बचत पहल में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है।

मंत्रालय के सचिव नलका कलुवेवा ने स्कूलों और संस्थानों से आग्रह किया कि वे छात्रों और कर्मचारियों के साथ तालमेल बिठाएं, ताकि बदले हुए शेड्यूल के बावजूद पढ़ाई प्रभावी ढंग से जारी रहे।

डेली मिरर के अनुसार, इस फैसले ने अभिभावकों और छात्रों के बीच इस बात पर चर्चा छेड़ दी है कि सप्ताह के बीच में इस छुट्टी से ऑनलाइन कक्षाएं, पाठ्येतर गतिविधियां और शैक्षणिक समय-सीमाएं कैसे मैनेज होंगी।

श्रीलंका उन देशों में से एक है जो ईंधन बचाने के लिए काम के घंटे कम कर रहा है; यह देश ज्यादातर ईंधन मध्य पूर्व से मंगाता है।

श्रीलंका के चार साल पहले के आर्थिक संकट की याद दिलाने वाले दृश्यों के बीच, रविवार से ईंधन की राशनिंग शुरू हो गई। पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग गईं और गाड़ी चलाने वालों के लिए हफ्ते में 15 लीटर पेट्रोल या डीजल की सीमा तय कर दी गई, जबकि सार्वजनिक परिवहन के लिए 200 लीटर तक ईंधन आवंटित किया गया।

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