Khabarwala24 UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्यभर में एनालॉग पनीर, घी, क्रीम, खोया और छेना समेत सभी एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत अब नकली और मिलावटी डेयरी विकल्पों की बिक्री पूरी तरह गैरकानूनी होगी।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 का कड़ाई से अनुपालन (UP News)
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार दूध और उससे निर्मित उत्पादों का निर्माण एवं विपणन केवल उनकी मौलिक और प्राकृतिक अवस्था में ही किया जा सकता है।
आदेश के लागू होते ही प्रदेश के सभी जिलों में एनालॉग डेयरी उत्पादों की खुली बिक्री और कमर्शियल उत्पादन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की थाली तक केवल असली, शुद्ध और सुरक्षित डेयरी उत्पाद पहुंचाना है, ताकि मिलावटी खाद्य पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को समाप्त किया जा सके।
प्रयोगशाला जांच में खुला मिलावट का बड़ा नेटवर्क (UP News)
यह कठोर प्रशासनिक निर्णय उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा हाल के दिनों में चलाए गए व्यापक सघन जांच अभियान के बाद लिया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने औचक निरीक्षण कर दूध, पनीर और खोया के दर्जनों नमूने एकत्र किए थे।
जब इन एकत्रित नमूनों की राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में विस्तृत तकनीकी जांच कराई गई, तो बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। जांच रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि बाजार में प्राकृतिक डेयरी उत्पादों के नाम पर बेचे जा रहे अधिकांश विकल्प वास्तव में वनस्पति वसा, रिफाइंड पाम ऑयल, सोयाबीन घटक और कई तरह के घातक अखाद्य रसायनों के मिश्रण से तैयार किए जा रहे थे।
कपड़ा धोने वाले डिटर्जेंट और टेल्कम पाउडर का हो रहा था इस्तेमाल (UP News)
प्रयोगशाला विश्लेषण में सामने आया कि एनालॉग पनीर और खोया की बनावट, सफेदी और गाढ़ापन बरकरार रखने के लिए जनस्वास्थ्य के साथ बेहद खतरनाक खिलवाड़ किया जा रहा था। मिलावटखोर इन कृत्रिम डेयरी उत्पादों को तैयार करने के लिए भारी मात्रा में टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट पाउडर, टाइटेनियम डाइऑक्साइड (औद्योगिक रंग) और लिक्विड ग्लूकोज जैसे घटिया पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे थे।
इससे भी अधिक गंभीर बात यह पाई गई कि दूध और खोए की रंगत को चमकदार और सफेद दिखाने के लिए सेफोलाइट, रानीपॉल, टीनोपॉल, हाइड्रोजन परॉक्साइड और कई प्रकार के जहरीले केमिकल न्यूट्रलाइजर्स मिलाए जा रहे थे। ये तत्व मानव शरीर के आंतरिक अंगों, विशेष रूप से पाचन तंत्र, लिवर और किडनी के लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं।
जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु खाद्य आयुक्त का बड़ा फैसला (UP News)
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, प्राकृतिक दूध वसा के स्थान पर गैर-डेयरी वसा और जहरीले रसायनों का यह कॉकटेल आम जनता को कैंसर, पेट की गंभीर बीमारियों और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर धकेल रहा था।
अधिनियम के तहत खाद्य सुरक्षा आयुक्त का यह प्राथमिक संवैधानिक दायित्व है कि वे बाजार में बिकने वाले प्रत्येक खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता सुनिश्चित करें। इसी दायित्व का निर्वहन करते हुए योगी सरकार ने समूचे उत्तर प्रदेश में एनालॉग उत्पादों के किसी भी रूप में क्रय-विक्रय को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं, विक्रेताओं और दुकानदारों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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