नई दिल्ली, 4 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में चल रहे तीन दिवसीय शब्दोत्सव 2026 में रविवार को आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक अनमोल नारंग शामिल हुए। उन्होंने श्रीश्री रविशंकर की किताब ‘एन इंटीमेट नोट टू दी सिंसियर सीकर’ पर चर्चा की। उन्होंने शब्दों की शक्ति, राष्ट्र निर्माण में जेनजी के महत्व के साथ ही वैश्विक अशांति पर अपने विचार साझा किए।
अनमोल नारंग ने शब्दोत्सव के अनुभव पर khabarwala24 से बात की। उन्होंने बताया, “मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। दिल्ली सरकार ने बहुत अच्छे से ऑर्गनाइज किया है। आज के समय में जहां इतना असंतुलन चल रहा है, दुनियाभर में कितने युद्ध चल रहे हैं, लोगों के मन में कितना उथल-पुथल रहता है, तो सेलिब्रेशन एक तरीका है। यह माध्यम है जिससे हम पॉजिटिव कार्य में उस एनर्जी को जोड़ सकते हैं। हर इंसान में क्रिएटिविटी रहती है, ऐसे कार्यक्रम उसको एक डायरेक्शन देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की बहुत जरूरत है।”
उन्होंने किताब पर कहा, “यह श्री श्री रविशंकर जी की 366 नॉलेज शीट्स हैं। 90 के दशक में गुरुदेव जहां भी होते थे, दुनिया भर में कुछ महत्वपूर्ण बोलते थे, वह कंपाइल होकर इस किताब के रूप में बना है। यह एक मैजिकल बुक है। कोई भी पेज खोलकर पढ़ें, वह नॉलेज उस समय आपके लिए परफेक्ट होती है। मेरा मानना है कि नॉलेज डिटर्जेंट जैसी होती है, जो मन के स्ट्रेस को हटा देती है। स्ट्रेस तो सिर्फ क्लाउड्स इन द स्काई है, क्लाउड हट गए तो आसमान इनफिनिट और ब्लू है।”
जेनजी के राष्ट्र निर्माण में रोल पर अनमोल नारंग ने कहा, “जेनजी बहुत क्लियर हैं। अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं, अंदर से संतुलित हैं, आगे बढ़ने के लिए तत्पर रहते हैं, डर नहीं रखते और अपने मन की सुनते हैं। लेकिन, अटेंशन स्पैन कम है, रिजल्ट जल्दी चाहिए।”
उन्होंने आगे बताया, “हर इंसान के लिए अध्यात्म बहुत जरूरी है। यह जीवन जीने की कला है, जिससे आप खुद से जुड़ते हैं और जो करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं।”
बांग्लादेश सहित वैश्विक अशांति पर उन्होंने चिंता जताई और कहा, “चाहे बांग्लादेश हो, यूक्रेन-रूस हो, 50-60 देशों में युद्ध चल रहा है। आज के समय में धर्म को हम युद्ध से जोड़ चुके हैं, लेकिन गुरुदेव कहते हैं धर्म या अध्यात्म गहरा रूप है। हर धर्म का मैसेज समान है, एक सुप्रीम पावर है, सेवा करें, समाज के लिए कार्य करें। अगर हम उसको पकड़ लें तो इनके बीच का अंतर हटा सकते हैं। लोगों को जोड़ना, साथ लेकर आगे बढ़ना, यही अध्यात्म है। आज देश में अध्यात्म की सबसे ज्यादा जरूरत है।”
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