एक हजार साल से भी पुराने अधिष्ठात्री के मंदिर का पांडवों ने कराया था निर्माण, मां के चरण को स्पर्श करती हैं सूर्य की पहली किरणें

जालौन, 21 फरवरी (khabarwala24)। देश-दुनिया में शक्ति को समर्पित कई देवालय हैं, जहां की बनावट हो या भक्ति से भरी कथाएं, भक्तों को आकर्षित करती हैं। ऐसा ही देवी का एक मंदिर उत्तर प्रदेश के जालौन में स्थित है। यमुना नदी के तट पर घने जंगलों और बीहड़ों के बीच स्थित ‘जालौन वाली माता का […]

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जालौन, 21 फरवरी (khabarwala24)। देश-दुनिया में शक्ति को समर्पित कई देवालय हैं, जहां की बनावट हो या भक्ति से भरी कथाएं, भक्तों को आकर्षित करती हैं। ऐसा ही देवी का एक मंदिर उत्तर प्रदेश के जालौन में स्थित है। यमुना नदी के तट पर घने जंगलों और बीहड़ों के बीच स्थित ‘जालौन वाली माता का मंदिर’ प्राचीन और प्रसिद्ध सिद्धपीठ है।

जानकारी के अनुसार, यह मंदिर एक हजार साल से भी पुराना माना जाता है और यहां की अधिष्ठात्री देवी मां जालौन वाली के नाम से विख्यात हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां मां की स्थापना की थी। महर्षि वेदव्यास द्वारा मंदिर की स्थापना कराई गई थी, जहां पांडवों ने तपस्या की और समय बिताया था। खास बात है कि मंदिर की प्रतिमा पूर्वमुखी है, जिससे सुबह की पहली सूर्य किरण सीधे मां के चरणों को स्पर्श करती है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, यह मंदिर बुंदेलखंड की गौरवशाली विरासत का हिस्सा है। यहां पहुंचते ही मन को शांति मिलती है और भक्त मां की अलौकिक छत्रछाया में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। मंदिर की भव्य वास्तुकला और सदियों पुरानी परंपराएं श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मां का ममतामयी स्वरूप कष्ट हरने और बिगड़े काम संवारने के लिए जाना जाता है। उनके अलौकिक श्रृंगार के दर्शन से आंखों में श्रद्धा और हृदय में भक्ति भर जाती है।

एक समय यह क्षेत्र चंबल के डकैतों के लिए कुख्यात था। डकैतों के कारण आम लोग यहां आने से डरते थे। फूलन देवी, फक्कड़, मलखान सिंह जैसे कई नामचीन डकैत यहां मां के दरबार में सिर झुकाते थे। हालांकि, डकैत कभी श्रद्धालुओं को परेशान नहीं करते थे। आजादी के बाद डकैतों के डर से मंदिर सुनसान रहता था, लेकिन पिछले 3 दशकों में पुलिस एनकाउंटरों से डकैतों का खात्मा हुआ और अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं। रोजाना हजारों की संख्या में भक्त बीहड़ों में स्थित इस मंदिर तक पहुंचते हैं।

माता के दर्शन-पूजन को लेकर श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है। मान्यता है कि मां भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। यहां दर्शन कर भक्त समृद्ध और संतुष्ट हो जाते हैं। मंदिर जीवन में शांति, विश्वास और मां की असीम कृपा का अनुभव कराने वाला धाम है।

अब सवाल है कि जालौन माता मंदिर तक कैसे पहुंचें? जालौन जिले का मुख्यालय ओराई है, जो मंदिर का निकटतम प्रमुख शहर है। मंदिर ओराई से लगभग 20-30 किमी दूर बीहड़ क्षेत्र में स्थित है, जहां स्थानीय परिवहन से पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से जाने के लिए निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन ओराई है, जो उत्तर मध्य रेलवे नेटवर्क पर स्थित है। यहां से झांसी, कानपुर, दिल्ली आदि से नियमित ट्रेनें उपलब्ध हैं। ओराई स्टेशन शहर केंद्र से मात्र 5 किमी दूर है। स्टेशन से टैक्सी, ऑटो या बस से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

ओराई मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए अच्छी तरह से सड़क से जुड़ा है। कानपुर, झांसी और आगरा से बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। दिल्ली, लखनऊ आदि से भी सड़क मार्ग सुगम है। मंदिर तक पहुंचने के लिए स्थानीय बस या निजी वाहन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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