छेनी-हथौड़ा वाले जादूगर जिन्होंने पत्थरों में डाल दी जान, विलक्षण प्रतिभा पर गुरु रामकृष्ण की गई थी सबसे पहले नजर

नई दिल्ली, 18 फरवरी (khabarwala24)। देश में ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने अपनी कलाकारी से अमिट छाप छोड़ी। ऐसे ही एक जादूगर थे हाथों में छेनी-हथौड़ा लेकर पत्थरों में प्राण फूंकने वाले राम वी. सुतार, जिन्होंने कई महापुरुषों की मूर्तियों को आकार दिया। भारत के महान शिल्पकार और ‘स्टैच्यू मैन’ के नाम से प्रसिद्ध राम वी. […]

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नई दिल्ली, 18 फरवरी (khabarwala24)। देश में ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने अपनी कलाकारी से अमिट छाप छोड़ी। ऐसे ही एक जादूगर थे हाथों में छेनी-हथौड़ा लेकर पत्थरों में प्राण फूंकने वाले राम वी. सुतार, जिन्होंने कई महापुरुषों की मूर्तियों को आकार दिया। भारत के महान शिल्पकार और ‘स्टैच्यू मैन’ के नाम से प्रसिद्ध राम वी. सुतार की जयंती 19 फरवरी को पड़ती है।

19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गुंडूर गांव के एक गरीब परिवार में जन्मे राम सुतार ने छेनी-हथौड़े से पत्थरों में प्राण फूंककर भारत के इतिहास, संस्कृति और एकता को अमर कर दिया। उनकी विलक्षण प्रतिभा पर सबसे पहले नजर उनके गुरु रामकृष्ण जोशी की पड़ी थी, जिन्होंने उन्हें मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लेने की सलाह दी।

बचपन से संघर्षों से गुजरते हुए राम सुतार ने अपनी शिक्षा में हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया और अंतिम वर्ष में गोल्ड मेडल से सम्मानित हुए। 1950 के दशक में उन्होंने भारतीय पुरातत्व विभाग के लिए एलोरा और अजंता की प्राचीन कलाकृतियों के संरक्षण और पुनर्स्थापना का जिम्मेदारी से कार्य किया। उनके हाथों से निकली कई मूर्तियां आज देश भर के हर कोने में स्थापित हैं, जो स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय नेताओं, समाज सुधारकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की जीवंत छवि प्रस्तुत करती हैं।

राम सुतार की कला की विशेषता यह थी कि वे पत्थरों पर केवल भव्य आकार नहीं देते थे, बल्कि चेहरे के भाव, आंखों की चमक, शरीर की मुद्रा और व्यक्ति के जीवन दर्शन को पत्थर या कांसे में बखूबी उतारते थे। उनकी मूर्तियां देखकर लगता है जैसे वे जीवित होकर बोल रही हों।

उन्होंने कई मूर्तियों को आकार दिया। इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है, जो गुजरात के केवड़िया में सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है, जो भारत की एकता और संकल्प का प्रतीक है। वहीं, महात्मा गांधी की ध्यान मुद्रा में बैठी प्रतिमा है। छत्रपति शिवाजी महाराज की घोड़े पर सवार भव्य मूर्ति समेत अन्य स्थानों पर 21 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसके अलावा, डॉ. बीआर अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, वी.डी. सावरकर और अन्य नेताओं की स्मारक मूर्तियां विभिन्न राज्यों में स्थापित हैं।

राम सुतार के योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 1999 में पद्म श्री और साल 2016 में पद्म भूषण से नवाजा। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार भी प्रदान किया। अंतिम समय तक वे सक्रिय रहे और युवा कलाकारों को प्रेरित करते रहे।

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