पहले सरकार पेसा एक्ट लागू करने की तारीख बताए, तभी हटेगी बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक: झारखंड हाईकोर्ट

रांची, 4 दिसंबर (khabarwala24)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य की सरकार से फिर पूछा है कि पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) अधिनियम, 1996 की नियमावली कब तक लागू की जाएगी? चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने इस संबंध में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा […]

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

रांची, 4 दिसंबर (khabarwala24)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य की सरकार से फिर पूछा है कि पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) अधिनियम, 1996 की नियमावली कब तक लागू की जाएगी? चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने इस संबंध में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं मिलता, तब तक बालू एवं लघु खनिजों के लीज के आवंटन पर कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक नहीं हटाई जाएगी।

अदालत ने पेसा एक्ट को लागू करने के संबंध में राज्य सरकार को पूरी जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। पहले उक्त प्रारूप कैबिनेट को-आर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था। आपत्ति आने पर फिर से संशोधित करने के लिए ड्राफ्ट कमेटी को भेजा गया है। वहां से इसे कैबिनेट भेजा जाएगा। सरकार की ओर से बालू सहित लघु खनिज के आवंटन पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया गया।

- Advertisement -

इस पर अदालत ने कहा कि पेसा एक्ट लागू करने की तिथि की जानकारी दी जाए। झारखंड हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को दो माह के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि संविधान के 73वें संशोधन और पेसा कानून की भावना के अनुरूप नियमावली तैयार कर लागू की जाए। इसके बाद अब तक नियमावली अधिसूचित नहीं की गई है।

इस पर आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता तान्या सिंह ने पक्ष रखा।

बता दें कि वर्ष 1996 में केंद्र ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम संसद में पारित कराया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। अनुसूचित क्षेत्रों वाले ज्यादातर राज्यों में यह कानून लागू हो चुका है। झारखंड में यह कानून तब लागू होगा जब यहां की राज्य सरकार इसके लिए स्थानीय आदिवासी परंपराओं के अनुसार नियमावली को अंतिम रूप देकर उसे अधिसूचित करे। लंबे समय से यह मामला टलता रहा है। वर्ष 2019 और 2023 में राज्य सरकार ने पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका है।

- Advertisement -

Source : IANS

डिस्क्लेमर: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में Khabarwala24.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर Khabarwala24.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News