नई दिल्ली, 20 जनवरी (khabarwala24) खान अब्दुल गफ्फार खान की पुण्यतिथि पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कहा कि इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपार योगदान दिया और अपने अडिग सिद्धांतों के लिए बार-बार कारावास की सजा भुगती। इन्हें ‘फ्रंटियर गांधी’ के नाम से जाना जाता है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा, “बाचा खान, जिन्हें फ्रंटियर गांधी के नाम से जाना जाता है, भारत रत्न से सम्मानित और शांति के प्रतीक खान अब्दुल गफ्फार खान की पवित्र याद में। आजादी की लड़ाई में एक महान हस्ती, उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान दिया और अपने सिद्धांतों के लिए बार-बार जेल गए। उन्होंने कई सालों तक कांग्रेस वर्किंग कमेटी में भी काम किया और संविधान सभा के लिए चुने गए।”
उनकी विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, “अहिंसा, सद्भाव और मानवीय गरिमा के प्रति उनका अटूट समर्पण पूरे भारत और दक्षिण एशिया में लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है और हमें उन साझा आदर्शों की याद दिलाता है जो हम सभी को एक साथ जोड़ते हैं।”
खान अब्दुल गफ्फार खान का जन्म 1890 में वर्तमान पाकिस्तान में स्थित उस्मानजई में हुआ था। कम उम्र से ही वे भारतीयों में शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल थे। महज बीस वर्ष की आयु में उन्होंने सामाजिक सुधार और सशक्तीकरण के उद्देश्य से कई स्कूलों में से पहले स्कूल की स्थापना की।
एक प्रमुख पश्तून नेता, खान रॉलेट एक्ट के विरोध में हुए आंदोलनों के दौरान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए। इसी दौरान उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई थी। अपनी निरंतर सक्रियता के कारण उन्हें 1920 और 1947 के बीच कई बार जेल भेजा गया और गंभीर यातनाएं दी गईं।
बाद में वे खिलाफत आंदोलन में शामिल हो गए और 1921 में उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में एक जिला खिलाफत समिति के अध्यक्ष चुने गए। 1929 में उन्होंने अहिंसक खुदाई खिदमतगार आंदोलन शुरू किया, जिसे लाल कमीज आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन कांग्रेस पार्टी के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था और 1947 में भारत के विभाजन तक इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1987 में खान अब्दुल गफ्फार खान भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्राप्त करने वाले पहले गैर-भारतीय बने। उनका निधन 20 जनवरी 1988 को पेशावर में हुआ और उन्हें अफगानिस्तान के जलालाबाद में दफनाया गया।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


