रामबन, 1 जनवरी (khabarwala24)। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें प्रशिक्षित चिकित्सकों, आशा कार्यकर्ताओं और विभाग की अन्य महिला कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को महिलाओं और बच्चों में एनीमिया से निपटने के प्रभावी उपायों के बारे में जागरूक किया गया। प्रशिक्षित डॉक्टरों ने प्रतिभागियों को एनीमिया की पहचान व रोकथाम और प्रबंधन के बारे में बताया। इसके अलावा, समुदाय तक पहुंचने में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।
चिकित्सकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आशा कार्यकर्ताओं को अपने-अपने इलाकों में जाना चाहिए, जागरूकता फैलानी चाहिए, शुरुआती चरण में एनीमिया के मामलों की पहचान करनी चाहिए और उचित मार्गदर्शन व फॉलो-अप सुनिश्चित करना चाहिए। इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप को मजबूत करना है, ताकि सामूहिक और लगातार प्रयासों से रामबन जिले को एनीमिया मुक्त बनाया जा सके।
डॉक्टर रेयाज ने khabarwala24 को बताया कि जिले में ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान पर लगातार काम किया जा रहा है और इस बारे में खामियों का पता लगाया जा रहा है। रामबन में हुए कार्यक्रम में खुली चर्चा की गई। अभियान को लेकर धरातल से काम शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आशा वर्कर्स आयरन फोलिक एसिड की सिरप छह महीने से पांच साल तक के बच्चों को पिलाएंगीं। हफ्ते में एक एमएल सिरप देनी है। आशा वर्कर्स इसे लगातार मॉनिटर करेंगीं और एक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। बाद में जब मां इसको समझ जाएगी तो वह खुद यह काम कर सकेगी। बाद में 5 साल से 9 साल तक के बच्चों के लिए पिंक टैबलेट दी जाएगी। फिर 10 साल से 19 साल तक के बच्चों को ब्लू टैबलेट दी जाएगी।
डॉक्टर अंकुला ने कहा कि हमने कार्यक्रम के दौरान आशा वर्कर्स को ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी है। आशा वर्कर्स को बताया गया है कि उन्हें घर-घर जाकर किस तरह बच्चों को दवा देनी है।
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