पटना, 17 मार्च (khabarwala24)। बिहार के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के बागी रुख ने सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने वोट न देने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उठाया है।
khabarwala24 से बातचीत में मनोज विश्वास ने बताया, “हमने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर चुनाव से अलग रहने का फैसला लिया। राजद ने उम्मीदवार तय करने से पहले हमारे नेतृत्व से कोई बातचीत नहीं की। जो उम्मीदवार दिया गया, वह हमारी विचारधारा के अनुरूप नहीं था।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पूरी मजबूती के साथ पार्टी के साथ खड़े हैं।
वहीं, वोट न देने वाले अन्य विधायकों का भी कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश के कहने पर ही यह निर्णय लिया। इस मुद्दे ने कांग्रेस के भीतर जातीय राजनीति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि पार्टी के अंदर अगड़ी-पिछड़ी की राजनीति हावी हो गई है, जिसका असर अब सामने दिख रहा है।
मनोज विश्वास ने आगे कहा, “जब हम बिहार में वोट मांगने जाते हैं तो हमारा वोट बैंक कौन है? अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग। लेकिन जिस उम्मीदवार को उतारा गया, उस पर हमारी पार्टी के साथ कोई तालमेल नहीं था।”
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पहले दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारने की बात हो रही थी, लेकिन महज 11 घंटे के भीतर एक ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और जो एक व्यवसायी है।
मनोज विश्वास ने कहा, “प्रदेश अध्यक्ष ने हमें साफ कहा था कि वोट देना है या नहीं, इसका फैसला हम खुद कर सकते हैं।”
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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