Khabarwala24 Varanasi News: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में हुई 22 वर्षीय श्रेया उपाध्याय की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने हैरान कर देने वाला पर्दाफाश किया है। शुरुआती जांच में जिसे एक एकतरफा या सिरफिरे प्रेमी की करतूत समझा जा रहा था, वह दरअसल 22 लाख रुपये की सुपारी लेकर रची गई दो दोस्तों की एक सुनियोजित और खौफनाक साजिश निकली। पुलिस ने सोमवार तड़के एक एनकाउंटर के बाद मुख्य कातिल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है।
प्रेम प्रसंग से शुरू हुई तल्खी और कत्ल का इरादा (Varanasi News)
वाराणसी पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा मुख्य आरोपी विवेक चौबे ने लिखी थी। विवेक और मृतका श्रेया उपाध्याय के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध चल रहे थे।
जांच में सामने आया कि पिछले कुछ महीनों से दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। पुलिस के अनुसार, विवेक, श्रेया की कुछ व्यक्तिगत आदतों, व्यवहार और लगातार बढ़ती मांगों से तंग आ चुका था और किसी भी कीमत पर उससे पीछा छुड़ाना चाहता था। जब उसे लगा कि सीधे रास्ते से अलग होना संभव नहीं है, तो उसने श्रेया को रास्ते से हटाने की साजिश रचनी शुरू कर दी।
ऑनलाइन लोन के जाल में फंसा दोस्त और 22 लाख का लालच
श्रेया की हत्या की खतरनाक योजना बनाने के बाद विवेक को एक ऐसे भरोसेमंद साथी की तलाश थी, जो इस जघन्य अपराध को अंजाम देने में उसका हाथ बटा सके। इसके लिए उसने अपने पुराने दोस्त पुनीत को चुना। पुनीत मूल रूप से मऊ जिले का रहने वाला है।
विवेक और पुनीत की दोस्ती मिर्जापुर के एक कॉलेज में बी-फार्मा की पढ़ाई के दौरान हुई थी। पुनीत उस समय बेहद गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। दरअसल, पुनीत अपनी प्रेमिका के महंगे शौक और लग्जरी लाइफस्टाइल को पूरा करने के चक्कर में कई ऑनलाइन चाइनीज और इंस्टेंट लोन ऐप्स के जाल में पूरी तरह फंस चुका था। उसके सिर पर लाखों रुपये का कर्ज चढ़ चुका था और रिकवरी एजेंट उसे लगातार परेशान कर रहे थे।
पुनीत की इसी लाचारी और पैसों की सख्त जरूरत का फायदा उठाते हुए विवेक चौबे ने उसे श्रेया की हत्या करने के बदले 22 लाख रुपये नकद देने का बड़ा ऑफर दिया। भारी-भरकम कर्ज से मुक्ति पाने और प्रेमिका के शौक पूरे करने के लालच में आकर पुनीत तुरंत कातिल बनने को तैयार हो गया।
हत्या के लिए किराए पर लिया कमरा, बनाई खौफनाक प्लानिंग
वारदात को अंजाम देने के लिए विवेक ने बनारस के रोहनिया थाना क्षेत्र के बच्छांव (पश्चिमपुरा) इलाके में एक कमरा किराए पर लिया। पुलिस की तफ्तीश में यह बात साफ हुई कि यह कमरा किसी के रहने के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ श्रेया को बुलाकर उसकी हत्या करने के मकसद से लिया गया था। कमरे के अंदर गृहस्थी का कोई भी सामान नहीं रखा गया था।
योजना के मुताबिक, 17 अगस्त की रात को ही विवेक और पुनीत उस किराए के कमरे में पहुंच गए थे और दोनों पूरी रात सुबह होने का इंतजार करते रहे। 18 अगस्त की सुबह विवेक ने श्रेया को बातों में उलझाकर किसी बहाने से उस सुनसान कमरे में बुलाया।
‘तू गला दबा, मैं चाकू मारता हूं…’ कमरे के अंदर का खौफनाक मंजर
जैसे ही श्रेया कमरे के भीतर दाखिल हुई, पहले से घात लगाकर बैठे विवेक ने पीछे से झपटकर उसका गला कसकर दबोच लिया ताकि वह चीख-पुकार न मचा सके। इसी दौरान कमरे में मौजूद पुनीत ने अपने पास रखे धारदार चाकू से सीधे श्रेया के पेट पर कई वार कर दिए।
चाकू के वार से श्रेया लहूलुहान होकर अचेत हो गई और फर्श पर गिर पड़ी। इसके बाद दरिंदगी की हदें पार करते हुए पुनीत ने चाकू से उसका गला रेतकर उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी।
कत्ल के बाद धोखा: 22 लाख की जगह मिला सन्नाटा
श्रेया की सांसे थमते ही इस खौफनाक कहानी में एक और नया मोड़ आया। हत्या को अंजाम देने के महज 20 मिनट बाद विवेक ने पुनीत से कहा कि वह बाहर अपनी गाड़ी से 22 लाख रुपये की तय रकम लेकर तुरंत लौटता है।
इसके बाद विवेक कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर निकल गया। पुनीत कमरे के भीतर श्रेया की खून से लथपथ लाश के पास बैठकर घंटों अपने दोस्त का इंतजार करता रहा।
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी विवेक वापस नहीं आया और उसका मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ बताने लगा, तब पुनीत को अहसास हुआ कि 22 लाख रुपये का लालच देकर उसके दोस्त ने ही उसके साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। खुद को फंसता देख पुनीत ने तुरंत अपने मोबाइल से एक ऑनलाइन कैब बुक की और मौके से रफूचक्कर हो गया।
सीसीटीवी, कैब ड्राइवर और कॉल डिटेल्स से खुला राज
घटना की सूचना मिलते ही वाराणसी पुलिस हरकत में आई। डीसीपी गोमती नीतू काद्यान के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में वारदात के समय एक संदिग्ध कैब की आवाजाही नजर आई।
पुलिस ने तुरंत कैब के नंबर के आधार पर उसके चालक का पता लगाया और उससे कड़ी पूछताछ की। कैब ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसने एक युवक को उस इलाके से पिक किया था।
इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस की मदद से पुनीत का मोबाइल नंबर ट्रैक किया और उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) निकाली। सीडीआर की जांच में साफ हो गया कि वारदात वाले दिन और उससे पहले विवेक और पुनीत के बीच लगातार दर्जनों बार बातचीत हुई थी। यहीं से पुलिस को इस पूरी साजिश और 22 लाख रुपये की डील की पक्की जानकारी मिली।
तड़के मुठभेड़ में पैर में लगी गोली, पुनीत गिरफ्तार; मुख्य आरोपी की तलाश जारी
सोमवार तड़के राजातालाब पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने पुनीत की मौजूदगी की सूचना पर घेराबंदी की। खुद को घिरा देख पुनीत ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की।
पुलिस की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में पुनीत के पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया।
पूछताछ में पुनीत ने कत्ल का पूरा सच उगल दिया। डीसीपी गोमती नीतू काद्यान ने बताया कि मुठभेड़ के बाद पकड़े गए आरोपी से मिली जानकारियों के आधार पर फरार मुख्य आरोपी विवेक चौबे को पकड़ने के लिए पुलिस की कई विशेष टीमें मिर्जापुर, मऊ और आसपास के जिलों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि मुख्य साजिशकर्ता को भी जल्द ही कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा।
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