खबरवाला 24 न्यूज हापुड़: श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति के तत्वावधान में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही देवी भागवत महापुराण में कथा व्यास भागवत कंकर श्री संतोष कुमार तिवारी ने कथा के तीसरे दिन बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की देवी कुष्मांडा हैं। कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। वहीं आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि अति प्रिय है और संस्कृत में कुम्हड़े को कूष्मांडा कहते हैं। इसीलिए मां दुर्गा के इस रूप को कूष्मांडा कहा जाता है।
महाशक्ति की महिमा को बताया
कथा व्यास भागवत कंकर श्री संतोष कुमार तिवारी ने महाशक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि दक्ष के यज्ञ के विध्वंस होने के पश्चात सती को कंधे पर रखकर भगवान शिव उनके वियोग में बहुत दुखी होकर इधर-उधर भ्रमण कर रहे थे उस समय पर श्री विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उन सती के अंगो को छेदन किया जो धरती पर 51 जगह सती के अंग गिरे वहीं पर 51 शक्तिपीठों के प्रकट हुए।
मां शक्ति की आराधना सभी को करनी चाहिए
उन्होंने बताया कि सभी प्राणियों को चाहिए कि जीवन का लक्ष्य भगवत प्राप्ति समझकर दान पुण्य जप तप सेवा के द्वारा दैविक शक्तियों का संग्रह भी हमें करना चाहिए । दैहिक, भौतिक और दैविक इन तीनों प्रकार की समस्याओं के निवृत्ति के लिए मां शक्ति की आराधना सभी को करनी चाहिए। कथा में मुख्य यजमान सुनील कुमार गोयल, जगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति के सदस्यगण आदि लोग मौजूद थे।










