Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story अपनी तनख्वाह दान की, रातों को धोए बर्तन… इस शख्स के त्याग के आगे सुपरस्टार रजनीकांत ने भी जोड़े हाथ

Khabarwala 24 News New Delhi: Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story “मैं आपको अपने पिता का दर्जा देना चाहता हूँ, मेरे साथ मेरे घर चलिए…” जब देश के सबसे बड़े सुपरस्टार रजनीकांत किसी साधारण व्यक्ति के सामने हाथ जोड़कर यह बात कहें, तो हर कोई हैरान रह जाता है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती […]

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Khabarwala 24 News New Delhi: Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story “मैं आपको अपने पिता का दर्जा देना चाहता हूँ, मेरे साथ मेरे घर चलिए…” जब देश के सबसे बड़े सुपरस्टार रजनीकांत किसी साधारण व्यक्ति के सामने हाथ जोड़कर यह बात कहें, तो हर कोई हैरान रह जाता है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है।

यह दास्तान है पद्मश्री से सम्मानित पालम कल्याणसुंदरम (Palam Kalyanasundaram) की। आखिर इस इंसान ने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा क्या किया कि सुपरस्टार रजनीकांत भी उन्हें अपना पिता मानने पर मजबूर हो गए? आइए जानते हैं निस्वार्थ सेवा और त्याग की यह अद्भुत कहानी।

मां की एक सीख और जिंदगी का अनोखा संकल्प (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

तमिलनाडु के एक बेहद छोटे से गांव मेलकरिवेलमकुलम में जन्मे कल्याणसुंदरम का बचपन दुखों से भरा रहा। बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ गया था, जिसके बाद उनकी बेसहारा मां ने अकेले दम पर उनका पालन-पोषण किया।

कल्याणसुंदरम की मां हमेशा उनसे एक बात कहती थीं— “बेटा, जितना पाकर जिओगे, वो तो बस तुम्हारा पेट भरेगा। लेकिन जो दूसरों में बांटकर जिओगे, वही तुम्हारी असली पहचान बनेगा।”

मां का यह एक मंत्र कल्याणसुंदरम के दिल और दिमाग में हमेशा के लिए घर कर गया। पढ़ाई में बेहद होनहार कल्याणसुंदरम ने लाइब्रेरी साइंस में गोल्ड मेडल हासिल किया और उन्हें जल्द ही एक सरकारी कॉलेज में लाइब्रेरियन की पक्की नौकरी मिल गई।

पहली सैलरी मिलते ही लिया चौंकाने वाला फैसला (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

जैसे ही कल्याणसुंदरम को जीवन की पहली तनख्वाह (Salary) मिली, उन्होंने एक ऐसा फैसला सुनाया जिसे सुनकर कॉलेज का हर कर्मचारी और अधिकारी दंग रह गया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया कि वे अपनी नौकरी की एक-एक पाई अनाथ और गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे।

उन्होंने अपने इस संकल्प को सिर्फ कहा ही नहीं, बल्कि निभाया भी। अपनी 35 साल की पूरी सेवा के दौरान उन्होंने अपनी 100 फीसदी तनख्वाह जरूरतमंदों, गरीब छात्रों और अनाथ आश्रमों को दान कर दी।

Rajinikanth palam kalyanasundaram story-
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खुद का पेट पालने के लिए रातों को किया वेटर का काम (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

अब सवाल यह उठता है कि अगर वे अपनी पूरी सैलरी दान कर देते थे, तो अपना खुद का पेट कैसे पालते थे?

अपनी बुनियादी जरूरतों और एक वक्त की रोटी के लिए कल्याणसुंदरम रातों को एक स्थानीय होटल में वेटर और सफाईकर्मी का काम किया करते थे। दिन के समय में वे एक प्रतिष्ठित कॉलेज के सम्मानित लाइब्रेरियन होते थे और रात ढलते ही होटल में प्लेटें धोते और झाड़ू लगाते थे।

साल 1962 में जब भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने देशवासियों से आर्थिक मदद की अपील की, तो यह 22 साल का युवक सीधे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज के पास पहुंच गया। उनके पास संपत्ति के नाम पर अपनी इकलौती 65 ग्राम की सोने की चेन थी, जिसे उन्होंने बिना एक पल संकोच किए ‘नेशनल डिफेंस फंड’ में दान कर दिया।

30 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय इनाम भी गरीबों में बांट दिया (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

वर्ष 1998 में जब कल्याणसुंदरम अपनी नौकरी से रिटायर हुए, तो उन्हें पेंशन और फंड के तौर पर करीब 10 लाख रुपये मिले। उन्होंने उस पूरी रकम को भी बिना एक पल गंवाए तुरंत दान कर दिया।

उनकी इस निस्वार्थ सेवा को देखते हुए एक अमेरिकी संस्था ने उन्हें ‘मैन ऑफ द मिलेनियम’ (Man of the Millennium) के खिताब से नवाजा और 30 करोड़ रुपये का नकद इनाम दिया। कल्याणसुंदरम ने उसमें से भी एक भी रुपया अपने लिए नहीं रखा और पूरी 30 करोड़ की राशि गरीबों और अनाथों के नाम कर दी।

जब मीडिया ने उनसे पूछा कि उन्होंने इतना बड़ा इनाम अपने पास क्यों नहीं रखा, तो उन्होंने सादगी से मुस्कुराकर कहा, “होटल में काम करके और पेंशन के मामूली हिस्से से मेरा गुजारा आराम से हो जाता है। जब इस दुनिया से जाएंगे, तो साथ क्या लेकर जाएंगे? सब यहीं रह जाना है।”

रजनीकांत ने क्यों दिया पिता का दर्जा? (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

साल 2012 में जब सुपरस्टार रजनीकांत को कल्याणसुंदरम जी के जीवन और उनके महान त्याग के बारे में पता चला, तो वे इतने भावुक हो गए कि उनसे मिलने खुद पहुंचे। रजनीकांत ने सार्वजनिक मंच पर उनके सामने हाथ जोड़े और उन्हें अपने पिता का दर्जा दिया।

रजनीकांत ने उनसे अपने आलीशान महल में साथ रहने की गुजारिश की, लेकिन कल्याणसुंदरम ने मुस्कुराते हुए नम्रता से मना कर दिया और कहा— “अभी मेरा काम खत्म नहीं हुआ है, मुझे अभी बहुत से भूखे और गरीब बच्चों तक पहुंचना है।”

भारत सरकार ने साल 2023 में कल्याणसुंदरम जी को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित किया।

85 की उम्र में भी जारी है सेवा, देह भी कर दी दान (Rajinikanth Palam Kalyanasundaram Story)

आज 84-85 साल की ढलती उम्र और गिरते स्वास्थ्य के बावजूद कल्याणसुंदरम जी का दिल गरीबों के लिए धड़कता है। लेकिन इस कहानी का सबसे भावुक कर देने वाला मोड़ यह है कि उन्होंने जीते जी ही नहीं, बल्कि अपनी मृत्यु के बाद भी सब कुछ दान कर दिया है।

उन्होंने अपनी आंखें और अपनी पूरी देह तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज को मेडिकल रिसर्च के लिए दान करने का कानूनी पत्र लिख दिया है। यानी जो इंसान अपनी पूरी जिंदगी की कमाई दूसरों के नाम करता रहा, वह इस दुनिया से जाने के बाद भी किसी न किसी के काम आता रहेगा। पालम कल्याणसुंदरम की जिंदगी पूरी दुनिया को सिखाती है कि दूसरों का सहारा बनने के लिए बड़ी जेब नहीं, बल्कि बड़े दिल की जरूरत होती है।

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