Khabarwala 24 News Kanpur: Kanpur Kidney Racketउत्तर प्रदेश के कानपुर में एक चौंकाने वाला मानव अंग तस्करी का रैकेट सामने आया है। मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल (32 वर्ष), उरई (जालौन) के सूर्यनगर का रहने वाला, मात्र आठवीं पास है। 12 साल पहले घर छोड़कर भाग गया था। आज वह सोने की मोटी चेन, कड़े, अंगूठियों से लदा रहता था, तीन लग्जरी कारों का मालिक था और खुद को प्रतिष्ठित डॉक्टर बताता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ आहूजा अस्पताल के डॉक्टर दंपती समेत कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया है।
गरीब युवकों को जाल में फंसाता था (Kanpur Kidney Racket)
शिवम की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि वह किडनी डोनर और रिसीवर के बीच दलाली करता था। जांच में पता चला कि कानपुर के कई निजी अस्पतालों में 40 से 60 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। किडनी गरीब युवकों से मात्र 5-10 लाख रुपये में खरीदी जाती थी और अमीर मरीजों को 60 लाख से 90 लाख रुपये तक में बेची जाती थी।
घर से भागने से लेकर माफिया बनने तक (Kanpur Kidney Racket)
शिवम अग्रवाल का परिवार उरई में जर्जर मकान में रहता है। पिता कृष्ण कुमार अग्रवाल की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी है। मां ममता देवी और 18 वर्षीय बहन अभी भी उसके काले कारोबार से अनजान थीं। गिरफ्तारी की खबर सुनकर मां बदहवास होकर कानपुर पहुंची।
लग्जरी कारें, सोने के गहने और तीन शादियां…(Kanpur Kidney Racket)
12 साल पहले घर छोड़ने के बाद शिवम ने तीन शादियां कीं। पहली दो पत्नियां उसे छोड़कर चली गईं, जबकि तीसरी पत्नी के साथ वह कानपुर के कल्याणपुर इलाके में रह रहा था। मोहल्ले वाले बताते हैं कि वह जब बाहर निकलता तो पूरी लग्जरी लुक में होता—सोने के गहने, महंगी कारें और डॉक्टर वाला अंदाज। पड़ोसी हैरान हैं कि इतनी रईसी का स्रोत क्या था। अब पता चला कि यह सब मासूमों की किडनी के सौदे से आया था।
कैसे करता था डील? टेलीग्राम और व्हाट्सएप से चला रैकेट (Kanpur Kidney Racket)
शिवम ने सबसे पहले ‘मदद 24×7’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। शुरू में इसे एम्बुलेंस सेवा का ग्रुप बताया गया, जिसमें कल्याणपुर और रावतपुर के कई अस्पताल संचालक जुड़े। धीरे-धीरे यह ग्रुप मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के नाम पर दलाली का माध्यम बन गया।
किडनी डोनर ग्रुप बनाया (Kanpur Kidney Racket )
बाद में शिवम ने टेलीग्राम पर किडनी डोनर ग्रुप बनाया और अपना मुख्य कारोबार शुरू कर दिया। वह एलएलआर (हैलेट) अस्पताल आने वाले सीधे-साधे मरीजों को “सस्ते और अच्छे इलाज” का झांसा देकर फंसाता था। व्हाट्सएप ग्रुप पर जो अस्पताल सबसे पहले जवाब देता, उसी में मरीज को ले जाता। इसी रास्ते से वह आहूजा अस्पताल के डॉक्टर दंपती डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और डॉ. प्रीति आहूजा से जुड़ा।
खुद को बताता था डाक्टर (Kanpur Kidney Racket)
शिवम खुद को डॉक्टर बताकर स्टेथोस्कोप और अप्रन पहनता था। गरीब युवकों, छात्रों और आर्थिक तंगी में फंसे लोगों को टेलीग्राम के जरिए संपर्क करता। उन्हें 8-10 लाख रुपये देने का लालच देकर किडनी डोनेट करने के लिए राजी करता। एक मामले में बिहार के समस्तीपुर का एमबीए छात्र आयुष को मात्र 50 हजार रुपये के विवाद में पुलिस के पास जाने के बाद पूरा रैकेट सामने आया। आयुष को 10 लाख का वादा किया गया था, लेकिन उसे बहुत कम मिला।
रैकेट में किडनी खरीद-बिक्री का सिलसिला इस प्रकार था: (Kanpur Kidney Racket)
- डोनर से किडनी 5-10 लाख में ली जाती।
- रिसीवर से 60 लाख से 90 लाख तक वसूले जाते।
- बीच में अस्पतालों और दलालों को कमीशन मिलता।
पुलिस के अनुसार रैकेट कानपुर से आगे बढ़कर अन्य राज्यों और नेपाल तक फैला हो सकता है। कई अस्पतालों में छापेमारी हुई, दवाइयां और नकदी बरामद की गई।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच (Kanpur Kidney Racket)
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संयुक्त छापेमारी की। आहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मेड लाइफ अस्पताल समेत कई जगहों पर छापे मारे गए। अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
गिरफ्तार आरोपी:
- शिवम अग्रवाल (मुख्य दलाल और मास्टरमाइंड)
- डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (54)
- डॉ. प्रीति आहूजा (50)
- डॉ. राजेश कुमार (44)
- डॉ. राम प्रकाश (40)
- डॉ. नरेंद्र सिंह (35)
पुलिस चार और डॉक्टरों की तलाश कर रही है। जांच में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय लिंक भी सामने आ सकते हैं।
विदेशी महिला का ढाई करोड़ में ट्रांसप्लांट (Kanpur Kidney Racket )
बताया गया कि गिरोह का आॅपरेशन स्टाइल किसी खुफिया मिशन से कम नहीं था। जहां डोनर, रिसीवर को एक दूसरे की बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती है। जांच में चौकाने वाला एक मामला भी शामिल आया जिसमें साउथ अफ्रीका की महिला को लेरक हुआ। इस महिला का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था और इसके लिए बताया जा रहा है कि करीब ढाई करोड़ रुपये लिए गए थे।
मानवता पर सवाल (Kanpur Kidney Racket)
यह रैकेट गरीबों के अंगों का शोषण करके अमीरों की जान बचाने का खेल था। एक ओर डॉक्टर दंपती जो मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े थे, दूसरी ओर मात्र आठवीं पास युवक जो खुद को डॉक्टर बताकर सैकड़ों लोगों को ठग रहा था। पुलिस अब पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ रही है।
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