चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन, सर्वार्थ सिद्धि-अमृतकाल के साथ विजय मुहूर्त का संयोग, नोट कर लें राहुकाल

नई दिल्ली, 19 मार्च (khabarwala24)। आदिशक्ति की आराधना के पर्व चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। ब्रह्मचारिणी मां की आराधना से तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। माता को सफेद वस्त्र, चंदन, फूल और सफेद मिठाई चढ़ाने का विधान है। इस दिन […]

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नई दिल्ली, 19 मार्च (khabarwala24)। आदिशक्ति की आराधना के पर्व चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। ब्रह्मचारिणी मां की आराधना से तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। माता को सफेद वस्त्र, चंदन, फूल और सफेद मिठाई चढ़ाने का विधान है। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है।

सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। साथ ही शनिवार दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग है, जो नए कार्य, पूजा और मंत्र जाप के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

19 मार्च को सूर्योदय 6 बजकर 25 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 32 मिनट पर होगा। वहीं, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पूरे दिन के साथ ही अगले दिन यानी 21 मार्च की देर रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र रेवती भी अगले दिन देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, फिर अश्विनी शुरू होगा। योग ब्रह्म रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। करण बालव दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

धार्मिक मान्यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए कार्य सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है। दृक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। अमृत काल की बात करें तो रात 12 बजकर 13 मिनट से देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं, निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक है।

अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक और यमगंड दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 1 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 7 बजकर 56 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक और वर्ज्य दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया, शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

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