Khabarwaa 24 News Lucknow: IAS Divya Mittal उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अपनी संवेदनशील कार्यशैली, जनता से सीधे जुड़ाव और बेहतरीन प्रशासनिक फैसलों से लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाली वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल को हाल ही में देवरिया जिलाधिकारी (DM) के पद से स्थानांतरित कर लखनऊ में राजस्व विभाग के विशेष सचिव पद पर तैनात किया गया था। पदभार संभालने के कुछ समय बाद ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कह दिया।
इस्तीफे की खबर से हर कोई हैरान (IAS Divya Mittal)
यूं अचानक 13 वर्षों के सफल प्रशासनिक सफर के बाद उनके इस्तीफे की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच उनके इस फैसले के पीछे की वजहों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, अपने इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबी और बेहद भावुक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर किसी विवाद या कारण का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन अपनी 13 साल की यात्रा, जनसेवा के अनुभवों और अपनी सोच को बड़े ही सुंदर शब्दों में व्यक्त किया है।
‘X’ पर लिखी भावुक पोस्ट: “13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया” (IAS Divya Mittal)
दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट की शुरुआत अपने शुरुआती दिनों और इस सेवा में आने के उद्देश्य को याद करते हुए की। उन्होंने लिखा:
“आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, मेरी लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।”
उनकी यह पोस्ट वायरल हो चुकी है और लोग इसे बार-बार पढ़कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतना सफल और लोकप्रिय करियर होने के बावजूद उन्होंने यह कठोर निर्णय क्यों लिया।
देवरिया, मीरजापुर और विंध्यवासिनी धाम: सीख और अनुभव (IAS Divya Mittal)
अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपनी तैनाती के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे हर जिले ने उन्हें जीवन का एक नया पाठ पढ़ाया।
उन्होंने आगे लिखा:
“बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था।”
उन्होंने प्रशासनिक सेवा के अपने मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए लिखा कि सच्चा सुकून पद या अधिकार में नहीं, बल्कि उन लोगों की आंखों में दिखा जिन्हें जीवन में पहली बार उनका हक मिला। उन्होंने लिखा कि जब किसी गरीब परिवार को पहली बार जमीन का पट्टा मिलता है, किसी दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिलता है या किसी प्यासे किसान के खेत तक पानी पहुंचता है, वही एक अधिकारी की असली सफलता होती है। उन्होंने माना कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक जीवित व्यक्ति का भविष्य छुपा होता है और उसकी गरिमा की रक्षा करना ही सच्चा न्याय है।
“मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ…” (IAS Divya Mittal)
जनता से मिले अगाध प्रेम को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने अत्यंत विनम्रता के साथ लिखा:
“मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।”
गुलाब की पंखुड़ियों से विदाई और लहुरिया दह का वो ऐतिहासिक दिन (IAS Divya Mittal)
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश की उन गिने-चुने अधिकारियों में शामिल रही हैं, जिनकी विदाई पर पूरी जनता सड़क पर उतर आई। 2023 में जब उनका तबादला मीरजापुर के जिलाधिकारी पद से बस्ती जिले में किया गया था, तो वहां की जनता इतनी भावुक हो गई थी कि उनकी गाड़ी पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों की बारिश कर दी गई थी। विदाई का वह वीडियो देशभर में वायरल हुआ था और लोगों ने उनकी लोकप्रियता की तुलना जननेताओं से की थी।
इस्तीफे के भावुक पल में भी दिव्या मित्तल को मीरजापुर के अत्यंत पिछड़े और पहाड़ी क्षेत्र ‘लहुरिया दह’ की एक वृद्ध मां याद आईं। मीरजापुर में अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल ने वर्षों से पानी के संकट से जूझ रहे पहाड़ी गांव लहुरिया दह में पहली बार नल से पानी पहुंचाया था। आजादी के दशकों बाद जब गांव में पानी पहुंचा, तो पूरा गांव उत्सव में डूब गया था।
अपनी पोस्ट की आखिरी लाइनों में उस घटना को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने लिखा: (IAS Divya Mittal)
“आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह सपना और वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा।”
इस्तीफे के पीछे की वजहों पर क्या कह रहे हैं लोग? (IAS Divya Mittal)
दिव्या मित्तल का अचानक इस्तीफा देना पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि उन्होंने अपने पत्र में किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक असंतोष का कोई जिक्र नहीं किया है, लेकिन जानकार मानते हैं कि कॉरपोरेट जगत से आकर सिविल सर्विसेज में अपनी पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल हमेशा एक स्वतंत्र और परिणाम-उन्मुख (result-oriented) शैली में काम करना पसंद करती थीं।
आईआईटी दिल्ली से बी.टेक और आईआईएम बैंगलोर से एमबीए करने के बाद लंदन में लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाली दिव्या मित्तल के लिए प्रशासनिक सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि ‘मिट्टी का कर्ज चुकाने’ का जरिया थी। उनके इस कदम से प्रशंसक हैरान भी हैं और उनके नए सफर के लिए उन्हें शुभकामनाएं भी दे रहे हैं।
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