Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News पिलखुवा स्थित प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान ‘दर्शना द स्कूल’ में विद्यार्थियों के लिए एक विशेष, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक 3D शो का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान से परे व्यावहारिक और दृश्यात्मक शिक्षा (Visual Learning) प्रदान करना था। 3D शो के माध्यम से बच्चों को विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रागैतिहासिक जीव-जगत और समुद्री जीवन की अद्भुत दुनिया को अत्यंत जीवंत रूप में देखने का अवसर मिला।
नील आर्मस्ट्रॉन्ग की चंद्रमा यात्रा और अंतरिक्ष विज्ञान का जीवंत दृश्य (Hapur News)
शो के पहले चरण में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष की सैर कराई गई। इसमें मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि—नील आर्मस्ट्रॉन्ग के चंद्रमा पर कदम रखने की ऐतिहासिक यात्रा को 3D में प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने देखा कि किस प्रकार अंतरिक्ष यान पृथ्वी से रवाना होकर अंतरिक्ष की गहराइयों को पार करता है और चंद्रमा पर सुरक्षित लैंड करता है। इसके साथ ही, चंद्रमा की सतह पर तस्वीरें खींचने और उन्हें पृथ्वी के कंट्रोल रूम तक पहुँचाने की प्रक्रिया को भी बहुत ही सरल व रोचक तरीके से समझाया गया।
प्रागैतिहासिक डायनासोर युग और शार्क के विकास की कहानी (Hapur News)
अंतरिक्ष यात्रा के बाद शो में विद्यार्थियों को करोड़ों वर्ष पुराने डायनासोर के युग में ले जाया गया। विशालकाय डायनासोरों की जीवनशैली, उनके शिकार करने के तरीके और उस समय के वातावरण को देखकर बच्चे आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद समुद्री जीवन पर केंद्रित सेशन में ‘शार्क के विकास’ (Evolution of Sharks) की कहानी दिखाई गई। इसके जरिए बच्चों ने जाना कि लाखों वर्षों के दौरान समुद्री जीवों में किस प्रकार शारीरिक परिवर्तन और क्रमिक विकास हुआ।

अत्यंत वास्तविक 3D प्रभाव और बच्चों का उत्साह (Hapur News)
इस शो की सबसे बड़ी विशेषता इसके उच्च गुणवत्ता वाले वास्तविक (Realistic) 3D प्रभाव रहे। चश्मा लगाते ही जब अंतरिक्ष, चंद्रमा, डायनासोर और शार्क के दृश्य सामने आए, तो बच्चों को ऐसा अनुभव हुआ मानो वे स्वयं उन घटनाओं और स्थानों के बीच मौजूद हैं। पूरे शो के दौरान छात्रों में अपार उत्साह, आश्चर्य और सीखने की जिज्ञासा देखी गई।
प्रधानाचार्या स्वाति तोमर का संबोधन (Hapur News)
दृश्यात्मक शिक्षा का महत्व कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती स्वाति तोमर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभवात्मक (Experiential) आयोजनों से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ती है। जब बच्चे किसी जटिल वैज्ञानिक या ऐतिहासिक विषय को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देखते हैं, तो वह ज्ञान उनके मस्तिष्क में स्थायी हो जाता है। दर्शना द स्कूल भविष्य में भी छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे रचनात्मक और आधुनिक शिक्षण माध्यम अपनाता रहेगा।
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