Khabarwala 24 News Lucknow: UP News उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। रालोद के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी डॉ. रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।
जयंत चौधरी को भेजे गए अपने त्यागपत्र में रामाशीष राय ने देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य, पार्टी की नीतियों, किसानों, युवाओं की उपेक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके इस कदम से न केवल उत्तर प्रदेश में रालोद के संगठन को तगड़ा धक्का लगा है, बल्कि सूबे की सियासत में नई हलचलों का दौर भी शुरू हो गया है।
‘व्यवस्था परिवर्तन का सपना आज भी अधूरा’— लोकनायक जयप्रकाश का जिक्र (UP News)
रामाशीष राय ने अपने इस्तीफे में अपनी राजनीतिक यात्रा और वैचारिक पृष्ठभूमि का विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ से प्रेरित होकर राजनीति के मैदान में उतरे थे।
उन्होंने अपने पत्र में भावुक होते हुए लिखा कि उस दौर में भ्रष्टाचार, बेतहाशा महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण और शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चिंता के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। जेपी ने व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देश के सामने रखा था, वह दशकों बीत जाने के बाद भी आज अधूरा प्रतीत होता है। उन्होंने इशारों-इशारों में जता दिया कि मौजूदा दौर में राजनीतिक दल अपने मूल सिद्धांतों से भटक रहे हैं।
किसान और नौजवान बेहाल: समाज में बढ़ रहा है असंतोष (UP News)
किसान और युवा केंद्रित राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए रामाशीष राय ने इन दोनों वर्गों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में किसान अपनी खून-पसीने की उपज का उचित मूल्य (MSP व सही दाम) पाने के लिए लगातार संघर्ष करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, देश का नौजवान भारी बेरोजगारी और अपने भविष्य की घोर अनिश्चितता से जूझ रहा है।
रामाशीष के अनुसार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर बढ़ती निराशा आम जनमानस में भारी असंतोष को जन्म दे रही है। भारतीय राजनीति धीरे-धीरे धनबल और शक्तिशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटती जा रही है, जिससे आम नागरिक और शोषित वर्ग हाशिए पर ढकेले जा रहे हैं।

‘जाति तोड़ो, समाज जोड़ो’ के संदेश की अनदेखी, उच्च पदों पर पहुंचे विभाजनकारी लोग (UP News)
सामाजिक समरसता पर बात करते हुए रामाशीष राय ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के महान महापुरुषों ने हमेशा “जाति तोड़ो, समाज जोड़ो” का नारा देकर राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को सींचा था।
लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज सार्वजनिक जीवन और राजनीति में ऐसे लोग उच्च पदों पर आसीन हो चुके हैं जो केवल सामाजिक विभाजन, जातीय उन्माद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं। राय ने स्पष्ट किया कि यह प्रवृत्ति भारतीय लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित—तीनों के लिए बेहद घातक और चिंताजनक है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चेतावनियों को किया याद (UP News)
राजनीति में बढ़ते धनबल और परिवारवाद पर प्रहार करते हुए पूर्व भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे रामाशीष राय ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का उल्लेख किया।
उन्होंने लिखा कि अटल जी ने वर्षों पहले चुनाव और राजनीति में आर्थिक शक्ति व धनबल के बढ़ते प्रभाव को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया था। आज उनकी वे आशंकाएं पूरी तरह सच साबित होती दिख रही हैं। राजनीति में अब वैचारिक प्रतिबद्धता और निष्ठा की जगह केवल आर्थिक ताकत और परिवारवाद का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
‘व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ (UP News)
अपने त्यागपत्र का समापन करते हुए रामाशीष राय ने कड़े शब्दों में लिखा कि संविधान, लोकतंत्र और देश की संवैधानिक संस्थाओं पर जिस तरह से लगातार प्रहार हो रहे हैं, उससे आज भारतीय लोकतंत्र खतरे में आ गया है।
उन्होंने नैतिक मूल्यों का हवाला देते हुए लिखा— “व्यक्ति से बड़ा दल होता है और दल से भी बड़ा देश होता है।” इन्हीं वैचारिक, नैतिक और सैद्धांतिक कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया।
क्या होगा अगला राजनीतिक कदम? सपा या कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज (UP News)
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने अनुपम मिश्रा को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया था। तभी से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज थीं कि डॉ. रामाशीष राय जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं।
अब उनके इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर कयासों का बाजार गर्म है: (UP News)
- समाजवादी पार्टी (SP): चर्चा है कि वह जल्द ही अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
- कांग्रेस (Congress): रामाशीष राय पूर्व में देवरिया से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, ऐसे में उनके दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
- देवरिया से चुनावी तैयारी: माना जा रहा है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की देवरिया सीट से मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक अपने राजनीतिक पत्तों को पूरी तरह नहीं खोला है।
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