लखनऊ, 13 जनवरी (khabarwala24)। समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम को समाजवादी विचारधारा का बताया। अब इस पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर निशाना साधा।
ओम प्रकाश राजभर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह बयान भगवान राम के बारे में नहीं है। यह पूरी तरह से अखिलेश यादव के बारे में दिया गया है ताकि उनके सर्कल में अपनी अहमियत बनी रहे, खुद को सुर्खियों में रखा जा सके और खुद को अखिलेश के खास नेताओं में से एक दिखाया जा सके। दुनिया पहले से ही भगवान राम के बारे में जानती है। वे कौन सी नई बात बता रहे हैं?”
उन्होंने सपा को घेरते हुए कहा, “जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तो पूरी पार्टी यादव-केंद्रित विचारधारा पर काम करती थी। वोट सभी समुदायों से मिलते थे, लेकिन नियुक्तियों में अलग ही सच्चाई दिखती थी। चाहे वह कांस्टेबल, लेखपाल या ग्राम सेवक की भर्ती हो, यादवों को प्राथमिकता दी जाती थी। समाजवादी पार्टी का हमेशा से यही वैचारिक तरीका रहा है। उस समय ये लोग कहां थे?”
राजभर ने एनडीए और पीडीए की तुलना करते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी पीडीए मॉडल, फैमिली डेवलपमेंट अथॉरिटी पर काम करती है। एनडीए गठबंधन में ऐसे नेता हैं जो टिकट और वोट दिला सकते हैं, लेकिन वहां किसी में भी एक विधानसभा में 2,000 वोट दिलाने की क्षमता नहीं है। यही फर्क है। यहां हमारे पास नेता हैं, वहां उनके पास फॉलोअर्स हैं। यहां संजय निषाद एक नेता हैं, जबकि वहां वे सिर्फ फॉलोअर्स हैं।”
उन्होंने निषाद पार्टी के संयोजक संजय निषाद की तारीफ करते हुए कहा, “सबसे पहले संजय निषाद को धन्यवाद, जिन्होंने अपने समुदाय के लोगों को, जो ज्यादातर पानी में रहते थे, राजनीतिक मंच पर लाकर सत्ता में जगह दिलाई। जो लोग राजनीति में दूसरों के पीछे चलते थे, उन्हें अब राजनीति के तरीके सिखाए गए हैं। पार्टी नेताओं के जोश, उत्साह और ऊर्जा से आने वाले दिन दिखाते हैं कि अगर हम भगवान राम की नाव पार लगा सकते हैं, तो हम अपनी नाव भी पार लगा सकते हैं।”
राजभर ने विकसित भारत-जी राम जी बिल के प्रशिक्षण शिविर के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा, “यह कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत एक सुधार कैंप से जुड़ा है। विपक्ष झूठा प्रचार कर रहा है कि यह बिल महात्मा गांधी के विजन के खिलाफ है। असल में, गारंटी वाले काम के 100 दिन को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। बिल के नए प्रावधानों के तहत मजदूरी सात दिनों के अंदर देने की गारंटी है। अगर पेमेंट में देरी होती है तो मजदूरों को ब्याज मिलेगा। अगर कोई मजदूर रोजगार के लिए अप्लाई करता है और उसे 15 दिनों के अंदर काम नहीं मिलता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।”
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