लखनऊ, 19 जनवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी परियोजना में देरी पाई जाती है तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से स्थलीय निरीक्षण किया जाए।
उप मुख्यमंत्री द्वारा 7 जनवरी को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन शुरू हो गया है। इसी क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के व्यय की विस्तृत स्थिति प्रस्तुत की। बैठक में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के लिए कुल 709.88 करोड़ का बजट प्रावधान है, जिसमें 35 लाख पूंजीगत मद तथा 709.53 करोड़ राजस्व मद के अंतर्गत हैं।
राजस्व मद में विभागीय मांग के सापेक्ष शासन द्वारा 431.03 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, जो कुल बजट का 60.74 प्रतिशत है। स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष विभागाध्यक्ष द्वारा 301.13 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें से 7 जनवरी तक 215.19 करोड़ रुपए (लगभग 49.92 प्रतिशत) का व्यय किया जा चुका है।
डिप्टी सीएम ने व्यय की गति तेज करने और स्वीकृत धनराशि का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बचत धनराशि का उपयोग जनहितकारी कार्यों में किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि कार्यालय व्यय मद की बचत से 2.30 करोड़ रुपए का पुनर्विनियोग ई-ऑफिस संचालन के लिए प्रस्तावित है, जिस पर शासन स्तर पर आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से परामर्शानुसार कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त, निदेशालय में ई-ऑफिस के अंतर्गत अभिलेखों एवं पत्रावलियों के डिजिटलीकरण के लिए 2.07 करोड़ रुपए तथा वेतन मद की बचत से 405 लाख रुपएके पुनर्विनियोग के प्रस्ताव को वित्त विभाग से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।
केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि विकास से जुड़े कार्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और इनमें किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, भवनों एवं अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा के कड़े पालन के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। इसके तहत मानक के अनुरूप कार्य न करने या अनावश्यक देरी करने वाले ठेकेदारों को चिह्नित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए। अगले 15 दिनों के भीतर सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। सभी परियोजनाएं वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले हर हाल में पूर्ण की जाएं। परियोजना में देरी की स्थिति में ठेकेदारों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक की समस्त जानकारी अब पोर्टल पर सार्वजनिक की जाए तथा शिकायतों के निस्तारण और विभागीय कार्यप्रणाली की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
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