मौन व्रत : दुरुस्त सेहत तो कोसों दूर रहती हैं मानसिक समस्याएं

नई दिल्ली, 17 जनवरी (khabarwala24)। आज की भागदौड़ और शोर-शराबे से भरी दुनिया में शांति एक दुर्लभ लेकिन बेहद जरूरी चीज है। अशांति, शोर-शराबे से न केवल शरीर रोगों का घर बन जाता है बल्कि तनाव, चिड़चिड़ापन, खिन्नता मानसिक रूप से परेशान कर देते हैं। ऐसे में मौन का अभ्यास न केवल सेल्फ-अवेयरनेस, मानसिक स्पष्टता […]

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नई दिल्ली, 17 जनवरी (khabarwala24)। आज की भागदौड़ और शोर-शराबे से भरी दुनिया में शांति एक दुर्लभ लेकिन बेहद जरूरी चीज है। अशांति, शोर-शराबे से न केवल शरीर रोगों का घर बन जाता है बल्कि तनाव, चिड़चिड़ापन, खिन्नता मानसिक रूप से परेशान कर देते हैं। ऐसे में मौन का अभ्यास न केवल सेल्फ-अवेयरनेस, मानसिक स्पष्टता और गहरी आंतरिक शांति प्रदान करता है।

सनातन धर्म में मौन व्रत को सर्वोत्तम तप माना जाता है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या है, मौन व्रत रखना धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

सदियों से आध्यात्मिक परंपराओं में मौन को आंतरिक स्वतंत्रता और सच्ची खुशी का मार्ग माना गया है। मौन केवल बाहरी शोर की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सक्रिय और पूरी चेतना के साथ अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। यह हमें बाहरी अशांति से दूर कर आंतरिक दुनिया की ओर ले जाता है।

आयुर्वेद की मूल भावना में मौन को मन की शांति, संयम, और ऊर्जा संरक्षण के रूप में महत्व दिया जाता है, जो योग और सात्विक जीवनशैली का हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार, अधिक बोलना वात दोष को बढ़ाता है, जिससे मन अशांत होता है, तनाव बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है। मौन रहने से मन शांत रहता है, जिससे सत्व गुण बढ़ता है। ऊर्जा बचती है, एकाग्रता और ध्यान की क्षमता बढ़ती है। तनाव, क्रोध पर नियंत्रण और ब्लड प्रेशर के साथ हृदय स्वास्थ्य भी सुधरता है।

भगवद्गीता में भी मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है, जिसके अनुसार, मौन व्रत मानसिक तप का रूप है, जो शरीर-मन के संतुलन के लिए लाभकारी है। यह वाणी, संयम से ओजस की रक्षा करता है और सेहत को मजबूत बनाता है।

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि शोर प्रदूषण न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि तनाव बढ़ाता है और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। वहीं, मौन का दिमाग पर गहरा और हीलिंग प्रभाव पड़ता है। एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पाया गया कि रोजाना दो घंटे की मौन रहने से ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ावा देती है, जिससे याददाश्त, भावनाओं और सीखने पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

मौन तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करता है, ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता है, नींद की गुणवत्ता सुधारता है और एकाग्रता, क्रिएटिविटी और भावनात्मक संतुलन बढ़ाता है। यह मेडिटेशन जैसा प्रभाव देता करता है, जो ब्रेन के लिए वरदान की तरह है।

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