बेंगलुरु, 4 मार्च (khabarwala24)। कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को आरोप लगाया कि दक्षिणी राज्यों को वित्तीय भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जीएसटी के हिस्से और प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के आवंटन में।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा तमिलनाडु के अपने समकक्ष एमके. स्टालिन के देश में संघीय ढांचे को मजबूत करने के रुख का समर्थन करने के बाद यहां पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि बड़ी परियोजनाएं अक्सर उत्तरी भारतीय राज्यों को आवंटित की जाती हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों को उनका हक नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि यह चिंता सामूहिक रूप से उठाई जा रही है। हम केंद्र को जीएसटी का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा देते हैं। यह एक जायज मांग है।
कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अत्यधिक ऋण लेने की आलोचना का जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य निर्धारित ऋण सीमा के भीतर ही है।
उन्होंने कहा कि ऋण लेने की एक सीमा है। नियमों के अनुसार, यह 25 प्रतिशत के भीतर होना चाहिए, और हम उस सीमा के भीतर ही हैं। आंकड़ों की बात करें तो हम दक्षिणी राज्यों में सबसे कम ऋण ले रहे हैं। कई राज्यों ने हमसे अधिक ऋण लिया है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में ऋण 95 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि हम वित्तीय अनुशासन के दायरे में पूरी तरह से हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित मतभेदों पर परमेश्वर ने कहा कि इस तरह के राजनीतिक घटनाक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। पार्टी नेताओं के साथ रात्रिभोज की बैठक की शिवकुमार की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, 1952 के पहले चुनावों से ही मुख्यमंत्री और नेता रात्रिभोज की बैठकें आयोजित करते आ रहे हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है। शिवकुमार द्वारा सभी को रात्रिभोज के लिए आमंत्रित करना एक सकारात्मक कदम है। यह संयम दिखाने की दिशा में एक कदम है, जो सकारात्मक है।
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