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कन्नूर में टिकट को लेकर सियासी हलचल, माकपा में ‘पावर डुओ’ की पकड़ और मजबूत

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कन्नूर, 3 मार्च (khabarwala24)। केरल के कन्नूर में विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों की घोषणा ने हलचल बढ़ा दी है। माकपा जिला समिति द्वारा 16 में से 13 सीटों पर नामों को मंजूरी दिए जाने के साथ ही यह संदेश साफ है कि सत्ता की कमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पार्टी के राज्य सचिव एमवी गोविंदम के हाथों में मजबूती से बनी हुई है।

जिले के कई दिग्गज नेताओं ई.पी. जयराजन, एम.वी. जयराजन और पी. जयराजन को टिकट न दिए जाने से भौंहें तन गई हैं। कन्नूर लंबे समय से पार्टी का वैचारिक और संगठनात्मक गढ़ माना जाता रहा है।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने गृह क्षेत्र धर्माडोम से एक और कार्यकाल के लिए मैदान में उतरेंगे।

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सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलाजा को उनके मजबूत गढ़ मट्टनूर से हटाकर पारंपरिक कांग्रेस क्षेत्र पेरावूर भेजे जाने पर हो रही है।

इसी बीच, एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को तालीपराम्बा से उम्मीदवार बनाया गया है, जो राज्य सचिव की मौजूदा सीट है। इस फैसले की तुलना 2021 से की जा रही है, जब तत्कालीन कार्यवाहक सचिव ए. विजयराघवन की पत्नी आर. बिंदु ने पहली बार चुनाव जीतकर उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कैबिनेट में जगह बनाई थी।

एक और चौंकाने वाला फैसला थलास्सेरी से विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर का टिकट काटना है, जहां वे लगातार तीसरी जीत की उम्मीद कर रहे थे। उनकी जगह पार्टी ने करायी राजन को उम्मीदवार बनाया है, जो एक हत्या मामले में जमानत पर बाहर हैं। यह निर्णय विपक्ष को मुद्दा दे सकता है।

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पय्यानूर, जिसे सीपीआई(एम) की सुरक्षित सीट माना जाता है, वहां मौजूदा विधायक टी.आई. मधुसूदनन को बरकरार रखा गया है। हालांकि, शहीद निधि संग्रह में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद सुलग रहा है। पार्टी से निष्कासित स्थानीय नेता वी. कुंजिकृष्णन कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ सकते हैं।

कन्नूर की 16 सीटों में से सीपीआई(एम) 13 पर चुनाव लड़ रही है, जबकि तीन सीटें वाम सहयोगियों के लिए छोड़ी गई हैं। 2021 में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने 14 सीटें जीतकर कांग्रेस को केवल दो सीटों तक सीमित कर दिया था।

इस बार भी संगठनात्मक अनुशासन कायम दिख रहा है, लेकिन अंदरूनी असंतोष के संकेत बताते हैं कि कन्नूर के इस ऐतिहासिक ‘रेड बास्टियन’ में चुनावी लड़ाई का रुख विपक्ष की ताकत से ज्यादा उम्मीदवारों के चयन से तय हो सकता है।

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