आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली, 29 जनवरी (khabarwala24)। संसद में गुरुवार को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट यानी आर्थिक विकास दर अगले वित्त वर्ष 2027 में 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो तीन साल पहले 6.5 प्रतिशत थी।सर्वे के अनुसार, देश में लगातार हो रहे घरेलू सुधार और […]

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नई दिल्ली, 29 जनवरी (khabarwala24)। संसद में गुरुवार को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट यानी आर्थिक विकास दर अगले वित्त वर्ष 2027 में 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो तीन साल पहले 6.5 प्रतिशत थी।

सर्वे के अनुसार, देश में लगातार हो रहे घरेलू सुधार और सरकारी निवेश की वजह से, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की अंदरूनी ताकत बढ़ी है।

लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि बीते दस वर्षों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है और अंतर्देशीय जलमार्गों से माल ढुलाई तेजी से बढ़ी है। इससे लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें कम हुई हैं और पूरी अर्थव्यवस्था की कार्यक्षमता में सुधार आया है।

सर्वे के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण महंगाई में बदलाव जरूर दिखता है, लेकिन सोना और चांदी को छोड़कर मुख्य महंगाई दर नियंत्रित बनी हुई है। यह संकेत देता है कि देश में सप्लाई सिस्टम मजबूत हो रहा है, उत्पादन क्षमता बढ़ रही है और परिवहन व्यवस्था बेहतर हुई है।

राज्य स्तर पर नियमों को आसान बनाने (डीरिगुलेशन) के प्रयासों से छोटे और मध्यम उद्योगों को आगे बढ़ने का मौका मिला है। इससे वे औपचारिक अर्थव्यवस्था से बेहतर तरीके से जुड़ पा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में देश की विकास क्षमता और मजबूत होगी।

सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार की पिछले कुछ वर्षों की संतुलित वित्तीय नीति से देश की आर्थिक स्थिरता बनी हुई है। सरकार ने विकास की जरूरतों और वित्तीय संतुलन के बीच सही तालमेल बनाए रखा है।

केंद्र सरकार के वित्तीय घाटे को कम करने के अनुभव से यह पता चलता है कि साफ लक्ष्य तय करना जरूरी है, लेकिन नीति में थोड़ी लचीलापन भी होना चाहिए। इससे अनिश्चित समय में सरकार की नीतियां विकास को रोकने की बजाय उसका समर्थन कर पाती हैं।

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में यह तय किया गया था कि वित्त वर्ष 2025-26 तक वित्तीय घाटा जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे लाया जाएगा। हर साल सख्त लक्ष्य तय करने की बजाय मध्यम अवधि की योजना बनाई गई, ताकि विकास से जुड़े खर्च, खासकर पूंजीगत निवेश (कैपेक्स), पर असर न पड़े।

दुनिया में भू-राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में निवेश, सप्लाई चेन और विकास को प्रभावित करेंगे। ऐसे समय में भारत को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत बनने, लगातार नवाचार करने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर डटे रहने की जरूरत है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस सर्वे में पेश किए गए आंकड़े दिखाते हैं कि भारत सही फैसले लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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