देशभर के स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में राज्यों से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली, 30 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। यह फैसला मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।सुप्रीम कोर्ट […]

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नई दिल्ली, 30 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। यह फैसला मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि छात्राओं का अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहौल मिले। कोर्ट ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था करें और वहां पूरी प्राइवेसी सुनिश्चित करें। साथ ही, दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

अदालत ने यह भी कहा है कि स्कूलों के टॉयलेट के अंदर मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध होने चाहिए। ये पैड मशीनों के माध्यम से या स्कूल परिसर में तय किए गए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा छात्राओं को दिए जाएं ताकि किसी तरह की झिझक या परेशानी न हो।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्कूलों में ‘मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर’ बनाने का निर्देश दिया है। इन कॉर्नर में मासिक धर्म से जुड़ी सभी जरूरी चीजें और जानकारी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्राएं खुद को सुरक्षित और जागरूक महसूस कर सकें।

अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दें और बताएं कि इस फैसले को जमीन पर कैसे लागू किया गया है। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बनाने को भी कहा है ताकि देशभर में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

यह याचिका मध्य प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड और अन्य मेंस्ट्रूअल प्रोडक्ट उपलब्ध कराए जाएं ताकि किसी भी छात्रा की पढ़ाई सिर्फ इस वजह से न रुके।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा कि वे मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर अपने-अपने स्तर पर जो योजनाएं और फंड से चलने वाली नीतियां हैं, उनकी जानकारी केंद्र सरकार को दें।

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