नई दिल्ली, 2 फरवरी (khabarwala24)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभाव) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि किफायती दवाओं, घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग द्वारा समर्थित टीकों और डायग्नोस्टिक से मध्यम और कमजोर वर्ग के फायदा होगा।
बजट के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसे पूरी तरह से समझने में समय लग सकता है, लेकिन बजट एक स्पष्ट, क्रमबद्ध दृष्टिकोण को दर्शाता है जहां संरचनात्मक सुधार अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से संचालित हैं और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी तेजी से एआई द्वारा संचालित हो रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने मध्यम वर्ग को मिलने वाले लाभों से संबंधित चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि बजट अल्पकालिक आय लाभ के बजाय बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल और जीवन यापन लागत को कम करने पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि बायोफार्मा, डायग्नोस्टिक, टीके और जीन-आधारित उपचारों में बड़े पैमाने पर निवेश से कैंसर, डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी लंबी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में 11-12 करोड़ से अधिक लोग डायबिटिक हैं और लगभग 14 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक हैं। और कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और अनुमान है कि 2030 तक प्रति वर्ष 20 लाख मामले सामने आएंगे।
10,000 करोड़ रुपए की बायोफार्मा शक्ति पहल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत पहले ही ग्लोबल बायो- मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में उभर चुका है और वैश्विक स्तर पर एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शीर्ष बायो-अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है।
उन्होंने कहा कि यह नया निवेश बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, टीकों, चिकित्सा उपकरणों और जीन-आधारित प्रौद्योगिकियों में क्षमताओं का विस्तार करके इस स्थिति को और मजबूत करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने बायोटेक्नोलॉजी को अगला प्रमुख औद्योगिक चालक बताया, जिसकी तुलना पूर्व के दशकों में आईटी द्वारा निभाई गई भूमिका से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आगामी औद्योगिक क्रांति एक बायो क्रांति होगी, जिसमें पुनर्चक्रण, पुनर्जनन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और उन्नत जीवन विज्ञान नवाचार शामिल होंगे।
डॉ. सिंह ने कहा कि बजट में गैर-संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जिन पर पिछले दशकों में ध्यान नहीं दिया गया था। उन्होंने घोषणा की कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए नए सुपर-स्पेशियलिटी शैक्षणिक और नैदानिक संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक और अधिक समान पहुंच सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने आयुर्वेद और फार्मास्युटिकल शिक्षा के नए संस्थान स्थापित करने के निर्णय पर भी प्रकाश डाला और कहा कि ये पहल पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मजबूत करेंगी और उन्हें आधुनिक अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा वितरण के साथ एकीकृत करेंगी।
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