मुंबई, 29 जनवरी (khabarwala24)। भारतीय रंगमंच की दुनिया में भारत रंग महोत्सव का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। यह महोत्सव न केवल नाट्य कलाकारों के लिए एक बड़ा मंच है, बल्कि थिएटर से जुड़े लोगों के लिए एक सपने जैसा है। हर साल देश-विदेश के चुनिंदा नाटक यहां प्रस्तुत किए जाते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर किसी नाटक का चुना जाना किसी भी कलाकार के लिए गर्व से भरा पल होता है। इसी कड़ी में अभिनेता पंकज त्रिपाठी का नाटक ‘लाइलाज’ 25वें भारत रंग महोत्सव के लिए चुना गया है, जिसे लेकर अभिनेता बेहद खुश हैं।
पंकज त्रिपाठी ने इस उपलब्धि को अपने जीवन का खास और दिल से जुड़ा हुआ पल बताया है। उन्होंने कहा, ”भारत रंग महोत्सव भारतीय थिएटर की आत्मा जैसा है और यहां अपने नाटक का चयन होना मुझे अपनी जड़ों से दोबारा जोड़ देता है। थिएटर ही वह जगह है, जहां से मैंने अभिनय की असली सीख ली और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) ने मुझे अनुशासन, सच्चाई और कला के प्रति सम्मान सिखाया।”
‘लाइलाज’ को पंकज त्रिपाठी और उनकी पत्नी मृदुला ने थिएटर बैनर ‘रूपकथा रंगमंच’ के तहत बनाया था। यह अब आधिकारिक रूप से भारत रंग महोत्सव में दिखाया जाएगा। इस महोत्सव का आयोजन दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा किया जा रहा है।
पंकज ने कहा, ”अपने नए थिएटर मंच की पहली ही प्रस्तुति को इतना बड़ा और सम्मानित मंच मिलना मेरे लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। ‘लाइलाज’ भले ही एक साधारण कहानी हो, लेकिन इसके पीछे कई कलाकारों और तकनीकी टीम की कड़ी मेहनत और थिएटर के प्रति गहरा विश्वास छिपा है।”
पंकज ने बताया कि यह नाटक लेखक और निर्देशक फैज मोहम्मद खान द्वारा लिखा और निर्देशित किया गया है। यह उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इस नाटक के जरिए वह करीब दस साल बाद थिएटर के मंच पर वापसी कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इस नाटक के जरिए उनकी बेटी आशी भी पहली बार थिएटर मंच पर कदम रख रही हैं।
उन्होंने कहा, ”बेटी के साथ मंच साझा करना मेरे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। मैं इसे सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि थिएटर को एक सच्ची भेंट मानता हूं।”
नाटक की सह-निर्माता और पंकज की पत्नी मृदुला ने भी इस सफलता पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ”जब मैंने रूपकथा रंगमंच की शुरुआत की थी, तब मेरा मकसद बड़े मंच की तलाश नहीं, बल्कि ईमानदारी और सच्चे भाव से कहानियां कहना था। भारत रंग महोत्सव जैसे मंच पर ‘लाइलाज’ का चुना जाना बेहद संतोषजनक और हौसला बढ़ाने वाला है।”
अपनी बेटी के थिएटर में पहले कदम को लेकर मृदुला ने कहा, ”माता-पिता के तौर पर यह हमारे लिए बेहद भावुक पल है। मैं दर्शकों, महोत्सव और उन सभी कलाकारों का आभार व्यक्त करती हूं, जो आज भी थिएटर की ताकत पर विश्वास रखते हैं। थिएटर आज भी लोगों को जोड़ने, भावनाओं को छूने और समाज को आईना दिखाने की ताकत रखता है।”
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