नई दिल्ली, 29 नवंबर (khabarwala24)। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में शनिवार को दिल्ली की एक अदालत बड़ा फैसला सुनाने वाली है। अदालत यह तय करेगी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। राजनीतिक रूप से संवेदनशील यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है।
इस केस में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और कई अन्य लोगों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने 7 नवंबर को आदेश सुरक्षित रखते हुए ईडी से कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे थे। अदालत ने केस रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा था कि कुछ दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की जानकारी को और गहराई से देखने की जरूरत है।
अदालत ने कहा था, “अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केस फाइलों की जांच के मद्देनजर जरूरी स्पष्टीकरण दे दिए हैं। आदेश 29 नवंबर को सुनाया जाएगा।”
ईडी का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एक बड़ी ‘आर्थिक साजिश’ के तहत नेशनल हेराल्ड के मूल प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति पर गलत तरीके से कब्जा किया। दावा है कि यह पूरा सौदा महज 50 लाख रुपए में यंग इंडियन नाम की कंपनी के जरिए किया गया।
यंग इंडियन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अधिकांश हिस्सेदारी है।
अदालत का कहना था कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, कथित किराए की रसीदें और फंड फ्लो का पूरा पैटर्न विस्तार से देखने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, यह जांच जरूरी थी ताकि यह तय किया जा सके कि ईडी की शिकायत पीएमएलए के तहत संज्ञान लेने योग्य है या नहीं।
जहां ईडी इस मामले को ‘गंभीर आर्थिक अपराध’ और ‘संपत्ति हड़पने की साजिश’ बता रही है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को ‘बहुत अजीब’ बताया है। उनका कहना है कि यंग इंडियन का गठन कानूनी नियमों के तहत हुआ और इसमें किसी भी तरह का निजी लाभ शामिल नहीं है।
ईडी का यह भी आरोप है कि कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के निर्देश पर कुछ लोगों ने वर्षों तक फर्जी अग्रिम किराया भुगतान दिखाया और नकली किराया रसीदें जारी कीं। एजेंसी के अनुसार, यह सब एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की बड़ी योजना का हिस्सा था।
नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह विवाद पहली बार 2012 में सामने आया था, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया था कि एजेएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया में कांग्रेस नेताओं ने धोखाधड़ी और भरोसे का उल्लंघन किया।
Source : IANS
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