Khabarwala24 News GST Rate Rationalisation: भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को और सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार को मंत्रिसमूह (GoM) की एक विशेष बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत अब जीएसटी के चार स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) को घटाकर केवल दो स्लैब (5% और 18%) कर दिया जाएगा। इस बदलाव से आम आदमी को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम हो सकती हैं।
जीएसटी (GST) स्लैब में बदलाव: क्या है नया प्रस्ताव?
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय GoM ने जीएसटी की मौजूदा चार दरों को बदलकर दो दरों की संरचना को मंजूरी दी है। नए प्रस्ताव के अनुसार:
5% टैक्स स्लैब: आवश्यक और अच्छी वस्तुओं व सेवाओं पर लागू होगा।
18% टैक्स स्लैब: मानक वस्तुओं और सेवाओं के लिए होगा।
40% हाई रेट टैक्स: तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों और लक्जरी कारों पर लागू होगा।
इसके तहत 12% और 28% टैक्स स्लैब को पूरी तरह खत्म करने की योजना है। पहले लक्जरी कारों पर 50% से अधिक टैक्स लगता था, जिसे अब घटाकर 40% करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव से जीएसटी प्रणाली को और सरल करने के साथ-साथ टैक्स अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
GoM के सदस्य: कौन-कौन हैं शामिल?
मंत्रिसमूह में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा और केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल शामिल हैं। इस समूह ने जीएसटी रेट्स को युक्तिसंगत बनाने के लिए गहन चर्चा की और केंद्र के प्रस्ताव को हरी झंडी दी।
आम आदमी को कैसे मिलेगी राहत?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में यह बदलाव मध्यम वर्ग, किसानों और छोटे-मझोले उद्यमों (MSME) के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। नया टैक्स स्ट्रक्चर सरल और पारदर्शी होगा, जिससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
99% वस्तुएं 12% स्लैब से 5% में: अगर जीएसटी काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो 12% टैक्स स्लैब की 99% वस्तुओं को 5% टैक्स स्लैब में शिफ्ट किया जाएगा।
28% स्लैब की 90% वस्तुएं 18% में: इसी तरह, 28% टैक्स स्लैब की 90% वस्तुओं को 18% स्लैब में लाया जाएगा।
इससे रोजमर्रा की जरूरत की चीजें, जैसे खाने-पीने का सामान, कपड़े और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
बीमा और हेल्थकेयर पर टैक्स छूट
मंत्रिसमूह ने व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी छूट के प्रस्ताव की भी समीक्षा की। इस छूट से सरकार पर सालाना करीब 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व बोझ पड़ सकता है। अधिकांश राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन यह शर्त रखी है कि इसका लाभ सीधे पॉलिसीधारकों को मिलना चाहिए।
अंतिम फैसला बाकी
हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। यह केवल GoM की सिफारिश है, जिस पर जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में विचार करेगी। अगर काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो जीएसटी की नई संरचना लागू हो जाएगी, जिससे टैक्स प्रणाली और पारदर्शी होगी।
जीएसटी स्लैब में यह प्रस्तावित बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है। सस्ती वस्तुओं और सेवाओं से आम आदमी को राहत मिलेगी, वहीं टैक्स अनुपालन बढ़ने से सरकार को भी फायदा होगा। अब सबकी नजर जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक पर है, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी।
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